पिथौरागढ़ में ऑलवेदर रोड पर दिल्ली बैंड से घाट तक खतरा, मानसून सीजन में बरसते हैं पत्थर

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टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 150 किमी की ऑलवेदर सड़क पिथौरागढ़ और चंपावत जनपदों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस सड़क ने सुदूर पहाड़ से मैदान पहुंचने का समय कम कर दिया है।

वहीं ऑलवेदर सड़क में आज भी कुछ स्थल ऐसे बन चुके हैं, जो लाइलाज बने हैं। मानसून काल में ये स्थल यात्रियों को दर्द देते हैं। ऑलवेदर रोड पर वाहनों की गति को थाम देते हैं। ऑलवेदर सड़क पर दिल्ली बैंड से घाट तक या फिर चंपावत का स्वाला दहशत पैदा करता है।

सामान्य दिनों में तो सबकुछ ठीक रहता है। मानसून काल परेशानी लेकर आता है। हल्की सी वर्षा में दिल्ली बैंड से घाट तक लगभग दो किमी क्षेत्र में आसमान से पानी की तरह ही पहाड़ में अटके पत्थरों की बरसात होती है।

यह वह समय होता है जब वाहन पत्थरों से बचने के लिए चालक गति के नियम भूल जाता है। वाहन में सवार यात्रियों का कलेजा हलक में आ जाता है। आने वाले वाहनों के यात्री दिल्ली बैंड और घाट पुल पास पहुंचने के बाद ही राहत की सांस लेते हैं।

आज से प्रारंभ होगी कैलास मानसरोवर यात्रा

इधर मानसून सक्रिय है और कैलास मानसरोवर यात्रा आज से आरंभ हो रही है। यात्रा को इसी मार्ग से कैलास मानसरोवर पहुंचना है। ऑलवेदर सड़क पर दिल्ली बैंड से घाट तक और चंपावत में घाट से सिंग्दा तक वर्षा होने पर सड़क डराती है। यही स्थिति बीते वर्ष भी थी और इस बार भी है। साल गुजर गया परंतु परंतु दिल्ली बैंड के पास से घाट तक पहाड़ पर अटके पत्थर नहीं हट सके हैं।

दो वर्षों से पहाड़ पर अटके पत्थरों और सड़क पर पहुंचे मलबे का नहीं हुआ निस्तारण

दोनों स्थल ऐसे हैं कि यदि वर्षा के दौरान कोई एक वाहन फंस गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस मार्ग पर चलने वाले वाहन चालक हो यां स्थानीय लोग सभी बीते तीन वर्षों से बनी इस स्थिति में सुधार नहीं होने पर रोष जताते हैं।

विगत दो वर्षों से पहाड़ पर अटके पत्थर और सड़क पर पहुंचा मलबा नहीं हटाया जाना राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की कार्यप्रणाली की भी पोल खोल रहा है। दिल्ली बैंड से घाट के बीच मार्ग बंद होने पर पिथौरागढ़ को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। पिथौरागढ़ से घाट तक इस समस्या के समाधान के लिए वाया जाख , मेलडुंगरी होते हुए घाट तक सड़क निर्माण कागजी दस्तावेज भ्रर रह गया है।

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