महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में ऑटो और टैक्सी सेवाओं से जुड़े गैर-मराठी भाषी चालकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 अगस्त के बाद जिन चालकों के पास मराठी भाषा प्रशिक्षण का मान्य प्रमाणपत्र नहीं होगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मार्गदर्शन में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य यात्रियों और चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना तथा सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाना है। इसके तहत 1 जून से 15 अगस्त तक सभी गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों को चार घंटे का ‘मराठी भाषा संचार पाठ्यक्रम’ पूरा करना अनिवार्य किया गया है।
सरकार ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन के लिए महाराष्ट्र राज्य मराठी भाषा विभाग, कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ को अधिकृत संस्थाओं के रूप में नियुक्त किया है। ये संस्थाएं चालकों को मराठी भाषा का प्रशिक्षण निःशुल्क उपलब्ध करा रही हैं। परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल इन्हीं संस्थाओं द्वारा जारी किए गए प्रमाणपत्रों को आधिकारिक मान्यता दी जाएगी।
परिवहन विभाग के संयुक्त आयुक्त रवि गायकवाड़ के अनुसार, मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में इस अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए लगभग 71 अध्ययन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां चालकों को मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान दिया जा रहा है।
अभियान को सफल बनाने के लिए कोंकण मराठी साहित्य परिषद के करीब 4,500 शिक्षकों को प्रशिक्षण कार्य में लगाया गया है। इसके अलावा क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) भी चालकों को पंजीकरण, प्रशिक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया में आवश्यक सहायता प्रदान कर रहे हैं।
विभाग का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य भाषा संबंधी बाधाओं को कम करना है। अक्सर यात्रियों और चालकों के बीच संवाद में भाषा को लेकर कठिनाइयां सामने आती हैं, जिससे सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होने से यात्रियों और चालकों के बीच संवाद अधिक सहज और प्रभावी होगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह कदम केवल भाषा सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे चालकों के पेशेवर अवसर भी बढ़ेंगे। स्थानीय भाषा की समझ होने से उन्हें यात्रियों से बेहतर संवाद स्थापित करने और सेवाएं अधिक कुशलता से प्रदान करने में मदद मिलेगी।
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि इस पहल से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में सुधार आएगा और स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के साथ-साथ यात्रियों को बेहतर अनुभव भी मिलेगा। 15 अगस्त की समयसीमा समाप्त होने के बाद विभाग प्रमाणपत्रों की जांच करेगा और नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी


