पूर्णिया जिले के धमदाहा नगर पंचायत क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के सैकड़ों लाभुक इन दिनों भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। योजना के तहत दूसरी किस्त की राशि समय पर नहीं मिलने के कारण गरीब परिवारों का आशियाना अधूरा पड़ा है। योजना के प्रथम दो चरणों में कुल 664 लाभुकों को पहली किस्त के रूप में एक-एक लाख रुपये प्रदान किए गए थे, जिससे उन्हें मकान का निर्माण लिंटेल स्तर तक पूरा करना था।
कर्ज लेकर लिंटेल तक पहुंचाया मकान, अब बढ़ी मुश्किलें
सरकारी नियमों के अनुसार, लाभुकों को निर्धारित 30.45 वर्गमीटर क्षेत्रफल में दो कमरे, रसोई, शौचालय और स्नानागार सहित मकान का निर्माण लिंटेल स्तर तक लाना था। लाभुकों ने समय पर काम पूरा करने के लिए निजी स्रोतों और साहूकारों से कर्ज लेकर मकान को लिंटेल स्तर तक पहुंचा भी दिया। इसके बावजूद, निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति होने के बाद भी दूसरी किस्त जारी नहीं की गई, जिससे कई परिवार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
अधूरे मकानों का काम ठप, ब्याज के चक्कर में फंसे लाभुक
दूसरी किस्त अटकने से एक तरफ जहां मकानों का शेष निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ लाभुकों पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। पीड़ितों का कहना है कि यदि दूसरी किस्त समय पर मिल जाती, तो मकान की छत ढलाई का काम तेजी से पूरा हो जाता और उन्हें बाजार से भारी ब्याज पर अतिरिक्त कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द से जल्द राशि जारी करने की गुहार लगाई है।
जानिए क्या है योजना का प्रावधान और किस्तों का गणित
नगर पंचायत क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत प्रत्येक पात्र लाभुक को कुल 2.50 लाख रुपये की सहायता राशि तीन अलग-अलग किस्तों में दी जाती है:
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पहली किस्त: 1 लाख रुपये (भूमि पूजन और लिंटेल स्तर तक दीवार खड़ी करने के लिए)
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दूसरी किस्त: 1 लाख रुपये (छत की ढलाई के कार्य के लिए)
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तीसरी किस्त: 50 हजार रुपये (प्लास्टर, खिड़की, दरवाजा और अंतिम फिनिशिंग के लिए)
इस योजना के तहत लाभुकों से बकायदा एकरारनामा (Agreement) भी कराया जाता है, जिसमें तय मानक के तहत ही निर्माण करना अनिवार्य होता है।
एक वर्ष की समय सीमा बीती, पहली किस्त के पैसों को बताया नाकाफी
नियमों के मुताबिक, लाभुकों को एक वर्ष के भीतर पक्का मकान बनाकर तैयार करना होता है। हालांकि, जमीन पर स्थिति थोड़ी अलग है। लाभुकों का साफ कहना है कि आज के समय में केवल एक लाख रुपये की पहली किस्त से मकान को लिंटेल स्तर तक पहुंचाना बेहद मुश्किल है। इसके लिए अधिकांश लोगों को अपनी जेब से या उधार लेकर पैसे लगाने पड़े। इन लाभुकों को अप्रैल और मई 2025 में पहली किस्त जारी की गई थी, और अब एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी वे दूसरी किस्त की राह देख रहे हैं।


