जलभराव और शहरी बाढ़ की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (यूएफएमसी) के बड़े स्तर पर अपग्रेडेशन की तैयारी तेज कर दी है। इसी क्रम में नगर आयुक्त अजय जैन ने यूएफएमसी में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित परियोजना की प्रगति और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की। जल्द ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रस्तुति केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के समक्ष ऑनलाइन की जानी है।
बैठक में नगर आयुक्त ने अधिकारियों से प्रस्तावित परियोजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली और निर्देश दिया कि सभी तकनीकी एवं वित्तीय विवरण समयबद्ध ढंग से तैयार किए जाएं। बैठक में मुख्य अभियंता अमित शर्मा, जलकल महाप्रबंधक रघुवेंद्र कुमार तथा सहायक नगर आयुक्त अविनाश प्रताप सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
नगर निगम की यह परियोजना लगभग 750 करोड़ रुपये की है, जिसके लिए एनडीएमए ने सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। पहले चरण में 220 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें 90 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। परियोजना की प्रगति और सफलता के आधार पर शेष धनराशि जारी की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि यूएफएमसी को ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट माडल के तहत अपग्रेड किया जाएगा। इसके अंतर्गत शहर में स्वचालित वर्षामापी यंत्रों (एआरजी) की संख्या बढ़ाई जाएगी, प्रमुख नालों पर आटोमेटिक वाटर लेवल रिकार्डर लगाए जाएंगे तथा वर्षा और जलस्तर की रियल टाइम मानिटरिंग को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही रामगढ़ताल, चिलुआताल, महेसरा और अन्य जल निकायों को शहरी जल प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ते हुए प्राकृतिक जल संचयन और निकासी तंत्र को सशक्त बनाया जाएगा।
गोरखपुर का अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। अब इसके उन्नयन के माध्यम से शहर को जलभराव मुक्त बनाने, बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली को और प्रभावी करने तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
नगर आयुक्त अजय जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्रीय स्तर पर होने वाली बैठक के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, तकनीकी प्रस्तुति, वित्तीय विवरण और अपेक्षित परिणामों से संबंधित सभी दस्तावेज तैयार रखे जाएं, ताकि परियोजना को शीघ्र स्वीकृति और वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके।


