गुजरात: गांधीनगर में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, पीड़िता को 5 महीने में मिला इंसाफ

 गांधीनगर के सेक्टर-24 के इंदिरानगर छपरा इलाके में 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में कोर्ट ने मिसाल देने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सिर्फ साढ़े पांच महीने के कम समय में इस घिनौने जुर्म के आरोपी रामनीत देवनंदन रामरूप यादव को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले अपराधी रामनीत देवनंदन रामरूप यादव को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि आरोपी की बॉडी जेल में उसकी मौत के बाद ही परिवार को सौंपी जाए। साथ ही, पीड़िता को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

लड़की को घर से किडनैप करके किया था दुष्कर्म

यह दिल दहला देने वाली घटना 15 दिसंबर, 2025 को हुई। आरोपी ने रात में घर में सो रही 4 साल की बच्ची को किडनैप किया, उसे पास की झाड़ियों में ले गया और उसके साथ रेप किया। जिसके बाद आरोपी बच्ची को मरा हुआ समझकर वहीं छोड़कर भाग गया।

हालांकि, कुछ मिनट बाद आरोपी यह देखने के लिए वापस आया कि बच्ची जिंदा है या मरी हुई। दूसरी ओर, होश में आते ही बच्ची बहादुरी से कांपते पैरों पर अपने घर लौटी और पूरी सच्चाई बताई।

आरोपी होमटाउन भागने की कोशिश में विफल

पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी की नज़र उस समय बच्ची पर पड़ी जब वह किराने की दुकान पर शॉपिंग कर रही थी। उसने 10 दिन पहले इस काम की प्लानिंग की थी और बच्ची को अपने साथ शामिल किया था।

क्राइम करने के बाद वह अपने घर बिहार भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से उसे सिर्फ़ 5 दिन में पकड़ लिया।

पुलिस पर हमला करते हुए की फायरिंग

गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस के रिकंस्ट्रक्शन के दौरान आरोपी ने पुलिस पर हमला भागने की कोशिश की। ऐसे में पुलिस ने खुद को बचाने के लिए 3 राउंड फायरिंग की, जिसमें एक गोली आरोपी के पैर में लगी। इसके बाद उसका सिविल हॉस्पिटल में इलाज करा कर रिमांड पर भेज दिया गया।

गांधीनगर के SP रवि तेजा वासम शेट्टी ने कहा कि अलग-अलग एजेंसियों और FSL टीम के कोऑर्डिनेशन की मदद से पुलिस ने मजबूत साइंटिफिक सबूत इकट्ठा किए थे।

बेगुनाहों को जल्द इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस ने दिन-रात मेहनत करके सिर्फ 13 दिन में चार्जशीट तैयार कर ली थी। पुलिस की तेज कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले ने समाज में एक मजबूत मिसाल कायम की है।

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