चीन और नेपाल बॉर्डर पर भारतीय सेना का कमाल, वाइब्रेंट विलेज में खोला 35 साल से बंद स्कूल

भारत-चीन सीमा पर सामरिक रूप से अति संवेदनशील 10500 फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रथम वाइब्रेंट विलेज गुंजी में शिक्षा की लौ फिर से जलाने के लिए भारतीय सेना ने ऐतिहासिक पहल की है।

उच्च हिमालयी व्यास घाटी की दुर्गम परिस्थितियों और शीतकालीन पलायन के कारण वर्ष 1991 से बंद पड़े राजकीय प्राथमिक विद्यालय गुंजी का ऑपरेशन सद्भावना के तहत सेना ने कायाकल्प कर दिया है।

ऑपरेशन सद्भावना

गत दिवस पिथौरागढ़ से पहुंचे ब्रिगेडियर और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में नवनिर्मित आधुनिक भवन का रिबन काटकर विधिवत लोकार्पण किया गया। चीन-नेपाल सीमा से सटे इस सीमांत गांव में पहुंचे सेना के शीर्ष अधिकारियों का पूर्व आईजी व वर्तमान ग्राम प्रधान विमला गुंज्याल, पूर्व प्रधान सुरेश गुंज्याल और सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल ने तिलक-आरती व माल्यार्पण कर रं परंपरा से भव्य अभिनंदन किया।

सेना ने करीब 72 लाख रुपये की लागत से कंप्यूटर लैब व किड्स पार्क जैसी सुविधाओं से सुसज्जित यह भवन तैयार किया है। उद्घाटन के बाद भवन को संचालन के लिए ग्राम सभा गुंजी को सौंप दिया गया। ग्राम सभा के निर्णयानुसार शिक्षा सत्र शुरू होते ही व्यास घाटी के नपलच्यू, गुंजी, नाबी, रोंगकोंग और कुटी गांवों के बच्चों को नर्सरी में प्रवेश दिया जाएगा। अभिभावकों से जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड लाने को कहा गया है।

विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सेना शुरु करेगी नर्सरी कक्षाएं

फिलहाल नर्सरी कक्षाएं सेना शुरु करेगी। कार्यक्रम में खंडशिक्षाधिकारी धारचूला के पहुंचने से बाद में सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति और उत्तराखंड शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर सरकारी स्कूल के रूप में संचालित किए जाने की संभावना है। इस अवसर पर गुंजी में शीतकालीन प्रवास के दौरान संचालित आंगनवाड़ी केंद्र संचालन पर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और महिला कल्याण विभाग से आंगनबाड़ी केंद्र संचालन के लिए वार्ता का निर्णय लियाइस अवसर पर पर बीईओ धारचूला, पद्मश्री मोहन सिंह गुंज्याल, पूर्व डीआइजी केएस. गुंज्याल, अवन सिंह गुंज्याल, पान सिंह गुंज्याल सहित व्यास घाटी की पांचों ग्राम सभाओं के ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित रहे। व्यास घाटी का गुंजी गांव प्रथम वाइबेंट गांव के अलावा आदि कैलास, कैलास मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव और भारत चीन सीमा व्यापार की भारतीय मंडी है। में स्थित है। व्यास घाटी का यह केंद्र है। बीते वर्ष सेवानिवृत्त आईपीएस विमला गुंज्याल यहां निर्विरोध प्रधान चुनी गई थीं।

तीन दशक पूर्व तक गुंजी सहित उच्च हिमालयी व्यास, दारमा घाटी में ग्रीष्मकालीन माइग्रेशन के दौरान सभी गांवों में प्राथमिक विद्यालय और कुछ स्थानों पर जूनियर हाईस्कूल संचालित होते थे। शीतकाल में यह विद्यालय धारचूला से लेकर जौलजीबी तक संचालित होते थे। वर्तमान में व्यास घाटी के विद्यालय धारचूला नगर में संचालित होते हैँ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *