प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा बचत और संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील का असर अब वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में साफ नजर आने लगा है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 18 मई से लागू नई व्यवस्था के पहले ही दिन अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारियों ने साझा परिवहन अपनाकर सकारात्मक संदेश दिया।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने आवासीय परिसर से कार्यालय तक की दूरी को ऊर्जा संरक्षण की भावना से जोड़ते हुए सहयोगियों के साथ सामूहिक रूप से कार्यालय पहुंचने का संदेश दिया। महिला नेतृत्व की इस संवेदनशील पहल ने परिसर में कार्यरत कर्मचारियों और शिक्षकों को भी प्रेरित किया कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं।
वहीं सामान्य दिनों में कार से आने वाले परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह सोमवार को अपने सहयोगी जितेंद्र कुमार पांडेय के साथ बाइक से विश्वविद्यालय पहुंचे। कुलसचिव केश लाल भी विभागीय कर्मचारियों को साथ लेकर कार्यालय पहुंचे, जबकि डिप्टी रजिस्ट्रार अजीत प्रताप सिंह स्वयं बाइक से कार्यालय आए।विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को अलग ही दृश्य देखने को मिला।
कई कर्मचारी, जो पहले कार से आते थे, अब बाइक से पहुंचने लगे हैं। वहीं आवासीय परिसर में रहने वाले शिक्षक और कर्मचारी पैदल व साइकिल से कार्यालय आते-जाते दिखे।गौरतलब है कि कुलसचिव द्वारा पूर्व में जारी निर्देश में ऊर्जा बचत के लिए कार्यालय संचालन, अवकाश व्यवस्था, कक्षाओं के समय निर्धारण और बिजली खपत कम करने को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे।
पांच दिवसीय कार्यालय व्यवस्था और आवश्यक कार्यों के लिए वर्क फ्रॉम होम की योजना भी बनाई गई है।परीक्षा फॉर्म भरने, परीक्षाओं और मूल्यांकन कार्य के बीच भी विश्वविद्यालय प्रशासन का यह कदम चर्चा में है। विश्वविद्यालय परिसर में शुरू हुई यह पहल अब कर्मचारियों के बीच व्यवहारिक बदलाव का उदाहरण बनती दिखाई दे रही है।


