हैदराबाद में बदहाल मिले 5 हस्की कुत्ते, एक ने तोड़ा दम; 30 लापता की खोज जारी

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हैदराबाद शहर के बाहरी इलाकों में पांच साइबेरियन हस्की कुत्ते लावारिस हालत में पाए गए है। जानकारी के अनुसार, शहर से दूर शंकरपल्ली-पटांचेरु सड़क के किनारे नंदी गांव के पास पांच साइबेरियन हस्की कुत्ते जिंदा हालत में एक कुत्ता मृत हालत में पाया गया; जिसके बारे में माना जा रहा है कि उसकी मौत लू लगने से हुई होगी।

वहीं, बचाव कार्य में लगे पशु कार्यकर्ताओं को आशंका है कि, आस-पास के इलाके में कम से कम 30 और कुत्ते अभी भी लापता हैं। मालूम हो कि, यह घटना तब सामने आई जब स्थानीय निवासियों ने AASRA Foundation और SWAN NGO के स्वयंसेवकों को सूचित किया था; ये दोनों ही संस्थाएं पशु बचाव और पुनर्वास के काम में लगी हुई हैं।

फोन पर NGO को दी गई जानकारी

स्वयंसेवकों ने बताया कि, उनको फोन पर बताया गया कि भीषण गर्मी में कई हस्की कुत्ते सड़क किनारे और पास की झाड़ियों में भटक रहे है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ कुत्तों को गांव वाले और वहां से गुजरने वाले लोग अपने साथ ले जा चुके थे। कार्यकर्ताओं को बताया गया कि इन जानवरों को कुछ दिन पहले ही इस जगह पर लाकर छोड़ दिया गया था।

उन्हें शक है कि इन कुत्तों को या तो किसी अवैध ब्रीडर ने छोड़ा है, या फिर किसी लैब में प्रयोग के बाद बेकार समझकर। कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया, “हम अभी भी छोड़े गए कुत्तों की सही संख्या का पता लगाने और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि वह गाड़ी कहां से आई थी।

खून के नमूने लेकर जांच के लिए भेजा गया

SWAN NGO के हर्ष किशोर भटनागर ने बताया, “यह पता लगाने के लिए कुत्तों के खून के नमूने लेकर जांच की गई है कि कहीं इन जानवरों पर किसी तरह का कोई अवैध प्रयोग तो नहीं किया गया था। उन्हें अभी भी निगरानी में रखा गया है।” हर्ष ने बताया कि एक बार ठीक हो जाने के बाद, उन्हें गोद देने की व्यवस्था की जाएगी; हालांकि, इसके लिए भावी मालिकों का ठीक से वेरिफिकेशन और उन्हें ट्रेनिंग में मदद मिलना जरूरी होगा।

जानवरों के कल्याण के लिए काम करने वालों ने पाटांचेरु इलाके में अवैध ब्रीडिंग के बड़े मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया है। यह इलाका लंबे समय से बाजार की मांग के चलते विदेशी नस्ल के कुत्तों की सप्लाई से जुड़ा रहा है। एनिमल वॉरियर्स कंजर्वेशन सोसाइटी के प्रदीप पी ने कहा, “हस्की जैसी नस्लों की लोकप्रियता के कारण उनकी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं, जो अक्सर 50,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक होती हैं।”

हालांकि, ऐसी नस्लों को पालना, खासकर भारत की गर्म जलवायु में, महंगा और मुश्किल दोनों है। नतीजतन, जो ब्रीडर आर्थिक तंगी का सामना कर रहे होते हैं, वे अक्सर इन कुत्तों को छोड़ देते हैं। उन्होंने हस्की कुत्तों का इस्तेमाल किसी तरह के प्रयोग के लिए किए जाने की संभावना को खारिज कर दिया, और इसके लिए इस नस्ल के आकार और स्वभाव का हवाला दिया।

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