किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) देशों के रक्षा मंत्रियों की 28 अप्रैल को होने वाली बैठक में वैश्विक-क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों के अतिरिक्त पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध से उपजे वैश्विक हालातों पर भी चर्चा की जाएगी।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। ईरान युद्ध संकट के बाद एससीओ देशों का यह पहला मंत्री स्तरीय सम्मेलन इस लिहाज से भी है कि रूस को छोड़ अधिकांश देश अपनी ईंधन की जरूरतों के लिए मध्यपूर्व तथा खाड़ी के देशों पर निर्भर हैं। ईरान भी एससीओ का सदस्य देश है।
भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एससीओ की बैठक
पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति के कारण उत्पन्न भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच इस वर्ष की एससीओ की यह बैठक हो रही है। यह संगठन इस क्षेत्र के सबसे प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक मंचों में से एक है और मौजूदा संघर्ष के प्रभाव को कम करने के लिए संभावित उपायों पर विमर्श कर सकता है।
अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच बीते करीब दो महीने से चल रहे संघर्ष के चलते क्रूड आयल की कीमतें जहां उछाल मार रही हैं वहीं इनकी आपूर्ति चेन में भी मारी उथल-पुथल है। इसलिए एससीओ रक्षामंत्रियों की बैठक में स्वाभाविक रूप से पश्चिम एशिया संकट के बातचीत से शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देने को लेकर चर्चा होगी ही।
अंतर्राष्ट्रीय शांति, आतंकवाद-विरोधी उपायों पर होगी चर्चा
वैसे इस बैठक के दौरान एससीओ के सदस्य देशों के रक्षा मंत्री क्षेत्र की रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। अंतर्राष्ट्रीय शांति, आतंकवाद-विरोधी उपायों और एससीओ सदस्य देशों के बीच रक्षा सहयोग से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
आतंकवाद के प्रति भारत के दृष्टिकोण को दोहराएंगे राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में राजनाथ सिंह वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के वर्तमान परिदृश्य में भारत की वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करेंगे। साथ ही आतंकवाद और चरमपंथ के प्रति भारत के सख्त और जीरो टॉलरेंस दृष्टिकोण को भी दोहराएंगे। रक्षामंत्री इस बैठक से इतर कुछ एससीओ सदस्य देशों के रक्षामंत्रियों से भी द्विपक्षीय मुलाकात और वार्ताएं भी कर सकते हैं।
मालूम हो कि एससीओ की जून 2001 में शंघाई में हुई थी और चीन के साथ भारत, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस इसके सदस्यों में शामिल हैं। भारत 2017 में एससीओ का पूर्ण सदस्य बना और वर्ष 2023 में इसकी अध्यक्षता संभाली थी।


