धर्मशाला के समीप मनूनी खड्ड में पिछले साल बादल फटने से आई बाढ़ में मारे गए जलविद्युत परियोजना के मजदूरों के स्वजन को अब मुआवजा मिलेगा। इस मामले में न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायाधीश के आदेश के बाद जलविद्युत परियोजना निर्माण में जुटी कंपनी ने न्यायालय में 1.22 करोड़ रुपये जमा करवा दिए हैं।
यह राशि पीड़ित परिवारों को प्रदान की जाएगी। बाढ़ में खड्ड में बन रहे पावर प्रोजेक्ट में कार्यरत आठ मजदूरों की मौत हुई थी। इस दर्दनाक हादसे के पीड़ित परिवारों को राहत देने की दिशा में कंपनी ने 1,22,41,950 रुपये की मुआवजा राशि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के तहत आयुक्त धर्मशाला सह वरिष्ठ दीवानी न्यायाधीश हकीकत ढांडा के न्यायालय के निर्देशानुसार जमा करवा दी है।
मामला 25 जून 2025 का है। ऊपरी क्षेत्र में बादल फटने के कारण आई बाढ़ के कारण मनूनी खड्ड पर बन रही जलविद्युत परियोजना के आठ कर्मचारियों की मौत हो गई थी। घटना दोपहर तीन से रात आठ बजे के बीच घटी थी। यह परियोजना इंदिरा प्रियदर्शिनी हाईड्रो पावर प्राइवेट लिमिटेड बना रही थी।
प्रकरण में नियोक्ता ने वर्कमैन क्षतिपूर्ति नियम, 1924 के तहत दुर्घटना की सूचना दी थी, लेकिन प्रारंभ में अधिनियम की धारा 8 (1) के अनुसार मुआवजा राशि जमा नहीं की गई थी। इस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए तत्काल अनुपालना के निर्देश जारी किए थे। न्यायालय के निर्देश का पालन करते हुए अब नियोक्ता ने पूरी मुआवजा राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से आयुक्त कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम धर्मशाला के पक्ष में जमा कर दी है।
यह राशि मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को प्रदान की जाएगी। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि आदेश की प्रतियां जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) कांगड़ा, चंबा, डोडा (जम्मू कश्मीर) और देवरिया (उत्तर प्रदेश) को भेजी जाएं, ताकि वे पीड़ित परिवारों को मुआवजा राशि के वितरण में आवश्यक सहायता प्रदान कर सकें। साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि आश्रित चाहें मुआवजा राशि को उनके संबंधित जिले के अधिकार क्षेत्र में स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे भुगतान प्रक्रिया और अधिक सुगम हो सकेगी।


