गंजाम जिले के छत्रपुर ब्लॉक अंतर्गत कालिपल्ली पंचायत इन दिनों किडनी रोग की भयावह चपेट में है।पिछले डेढ़ दशक में यहां की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इसे अब स्वास्थ्य आपदा के रूप में देखा जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पास स्थित इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (IREL) के मोनाजाइट प्लांट से निकलने वाले प्रदूषित पानी के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी खामोश हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते वर्ष पूर्व सरपंच पद्मचरण साहू के भाई बसंत कुमार साहू समेत 7 लोगों की किडनी रोग से मौत हो चुकी है।वर्तमान में कालिपल्ली, बड़पुटी, हरिपुर और बंदरगांव क्षेत्र के 97 लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
वहीं स्थानीय स्तर पर जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में करीब 40 लोगों की जान इस बीमारी से जा चुकी है।कालिपल्ली पंचायत में 12 गांव शामिल हैं और लगभग हर गांव में किडनी रोग के मरीज मिल रहे हैं।
खासकर कालिपल्ली और बड़पुटी में हालात ज्यादा गंभीर हैं। कई बार शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में पहुंचकर जांच और पानी के नमूने तो लेती है, लेकिन बीमारी के मूल कारण का अब तक खुलासा नहीं हो सका है।
स्क्रीनिंग के नाम पर खानापूर्ति का आरोप
आईआरईएल प्रबंधन ने हर गांव में स्वास्थ्य जांच के लिए एक करोड़ रुपये खर्च करने और 20 प्रकार की स्क्रीनिंग कराने की घोषणा की थी। जनवरी में मुनीषीपेंठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सहयोग से यह अभियान शुरू भी हुआ, लेकिन एक ही दिन में इसे बंद कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी सिर्फ दिखावा कर रही है और उसके दबाव में स्वास्थ्य विभाग सच्चाई उजागर नहीं कर रहा।
मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित पंचायत
स्वास्थ्य संकट के बीच कालिपल्ली पंचायत बुनियादी सुविधाओं से भी जूझ रही है। आसपास कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के कारण लोगों को मामूली इलाज के लिए भी बरहमपुर और छत्रपुर जाना पड़ता है।
रोजगार के नाम पर भी स्थानीय लोगों को निराशा हाथ लगी है। जमीन देने के बावजूद उन्हें उद्योगों में काम नहीं मिला।इतना ही नहीं, 60 से 70 वर्ष के करीब 200 बुजुर्ग पेंशन से वंचित हैं, जबकि सैकड़ों लोगों को राशन कार्ड नहीं मिल पाया है। विकास योजनाओं का लाभ भी यहां तक नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
लगातार बढ़ते मामलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग अब अपने ही गांव में रहने को असुरक्षित मानने लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पानी की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
किडनी रोग के कारण
प्रदूषित पानी: भारी धातु (जैसे सीसा, आर्सेनिक) या रसायनों से दूषित पानी किडनी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है।
अत्यधिक फ्लोराइड/नमक: भूजल में अधिक फ्लोराइड या लवणता भी किडनी पर असर डालती है।डायबिटीज व उच्च रक्तचाप किडनी फेल होने के प्रमुख कारण माने जाते हैं।बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेने से भी किडनी प्रभावित होती है। लगातार शरीर में पानी की कमी रहने से किडनी पर दबाव बढ़ता है।
निवारण व सावधानियां
शुद्ध पानी का सेवन करें, पानी को फिल्टर या उबालकर ही पिएं।समय-समय पर ब्लड व यूरिन टेस्ट कराएं।ब्लड प्रेशर व शुगर नियंत्रित रखें।बिना सलाह दवाओं का सेवन न करें।पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित आहार लें।सरकारी स्तर पर पानी की गुणवत्ता की जांच, शुद्ध पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता जरूरी।


