हड्डियों की मजबूती ही नहीं, पेट की हर तकलीफ का भी ‘सुपरहीरो’ है विटामिन-D; डॉक्टर का बड़ा खुलासा

 इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज और क्रोहन डिजीज जैसी समस्याएं, आज के खराब लाइफस्टाइल में काफी आम हो गई हैं। इन बीमारियों के कारण लोगों को अक्सर पेट में तेज दर्द, दस्त, सूजन और पाचन से जुड़ी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, हाल ही में हुए शोध एक बहुत ही पॉजिटिव खबर लेकर आए हैं और वह यह है कि एक खास विटामिन आपकी इन सभी तकलीफों को कम करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। आइए, PSRI अस्पताल, दिल्ली के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. नृपेन सैकिया से डिटेल में जानते हैं इस बारे में।

सिर्फ हड्डियों के लिए नहीं, इम्युनिटी का भी रक्षक

हम सभी आमतौर पर यही मानते हैं कि ‘विटामिन D’ का काम सिर्फ हमारी हड्डियों को मजबूत बनाना है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ हड्डियों तक ही सीमित नहीं है।

मेडिकल साइंस के अनुसार, यह विटामिन हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने में भी बेहद जरूरी है। आंतों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां ‘ऑटोइम्यून’ होती हैं- यानी एक ऐसी स्थिति जहां शरीर का अपना ही सुरक्षा तंत्र गलती से अपनी स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगता है।

ऐसी स्थिति में विटामिन-डी शरीर की सूजन को कम करने और इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया को सही दिशा में नियंत्रित करने में बड़ी मदद करता है।

“लीकी गट” से बचाव और आंतों की मजबूती

इसके अलावा, आंतों को सुरक्षित रखने में भी विटामिन D का काम किसी मजबूत दीवार की तरह होता है। यह हमारी आंतों की परत (को ताकत देता है। अगर किसी कारणवश आंतों की यह दीवार कमजोर हो जाए, तो “लीकी गट” नाम की खतरनाक समस्या पैदा हो सकती है।

इस स्थिति में हानिकारक टॉक्सिन्स और खतरनाक बैक्टीरिया आसानी से शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। शरीर में विटामिन D की सही मात्रा इस परत को मजबूत बनाए रखती है और ऐसे जोखिमों को काफी हद तक टाल देती है।

विटामिन-डी की कमी से बढ़ सकती है IBD की तकलीफ

कई मेडिकल स्टडीज में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि जिन लोगों में विटामिन D की कमी पाई जाती है, उनमें IBD जैसी आंतों की बीमारियों के लक्षण कहीं ज्यादा गंभीर और तकलीफदेह होते हैं।

डॉक्टरों ने पाया है कि ऐसे मरीजों को जब विटामिन-डी के सप्लीमेंट दिए जाते हैं, तो उनके लक्षणों में काफी हद तक सुधार देखने को मिलता है। हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि सिर्फ विटामिन-डी ही इन बीमारियों का इकलौता इलाज नहीं है, बल्कि यह आपके संपूर्ण इलाज और रिकवरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने का एक बहुत ही शानदार तरीका है।

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