‘महिलाओं के आरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन में देरी न्याय में देरी के समान’, बोले रिजीजू

 केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से कहा कि महिलाओं के आरक्षण अधिनियम के क्रियान्वयन में देरी करना लाखों महिलाओं के लिए न्याय में देरी करने के समान है। उन्होंने मुख्य विपक्षी पार्टी से आग्रह किया कि वे राजनीति से ऊपर उठकर 2029 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने के समर्थन में आगे आएं।

खरगे के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र के जवाब में रिजीजू ने कहा कि महिला आरक्षण का मामला राजनीति का मामला नहीं है, बल्कि भारत की बेटियों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को बनाए रखने का है। खरगे ने सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं के आरक्षण कानून में जल्दबाजी करने का आरोप लगाया था।

बढ़ाया गया संसद का सत्र

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ एक लंबे समय से संजोई गई राष्ट्रीय आकांक्षा का परिणाम है। संसद का बजट सत्र बढ़ा दिया गया है और 16 से 18 अप्रैल तक सदन की एक विशेष बैठक बुलाई गई है, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम (जिसे आमतौर पर महिलाओं आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है) के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक संशोधनों पर चर्चा की जाएगी।

रिजीजू ने कहा कि मोदी सरकार ने इस कानून को वास्तविकता में बदला है और अब सीमांकन से जुड़े आवश्यक संशोधन जरूरी हैं ताकि महिलाओं को 2029 से पहले उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

‘महिलाओं से किए वादे टालमटोल राजनीति का हिस्सानी नहीं बन सकते’

उन्होंने एक्स पर कहा, ‘देश की महिलाओं से किए गए वादे टालमटोल की राजनीति का हिस्सा नहीं बन सकते। आज जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने का समय आया है तो हिचकिचाहट और सवाल उठाए जा रहे हैं। मैं पूरी विनम्रता के साथ इस बात से असहमत हूं।’

उन्होंने कहा कि महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा लगभग तीन दशकों से चर्चा में है और किसी भी देरी का मतलब होगा महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में उचित स्थान से वंचित करना।

रिजीजू ने कहा कि जब यह कानून 2023 में पारित हुआ तो अधिकांश पार्टियों और हितधारकों का यह मानना था कि इसे जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। बता दें कि इसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का प्रविधान है।

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