। पश्चिम एशिया में तनाव का असर उत्तर प्रदेश के निर्यात पर भी पड़ सकता है। अगर खाड़ी देशों में तीन माह से अधिक समय तक तनाव बरकरार रहता है तो शिपिंग लागत में करीब 10 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी होने की संभावना है।
साथ ही संबंधित देशों में विभिन्न प्रकार के उत्पाद पहुंचाने में ज्यादा समय लगेगा। इससे भुगतान चक्र प्रभावित होगा, जिसका सीधा असर आने वाले समय में निर्यात पर पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश से वर्ष 2024-25 में 1.86 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया गया था। इसमें सबसे अधिक 19 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को किया गया था। वहीं ब्रिटेन को सात प्रतिशत, संयुक्त अरब अमीरात को छह प्रतिशत, जर्मनी, नेपाल और आस्ट्रिया को पांच-पांच प्रतिशत, फ्रांस को चार प्रतिशत, स्पेन, नीदरलैंड और इटली को तीन-तीन प्रतिशत निर्यात किया गया था।
पश्चिम एशियाई देशों में उत्तर प्रदेश से फल, सब्जियां, रेडीमेड गारमेंट, चमड़ा, लेदर उत्पाद, चावल, हस्तशिल्प, इलेक्ट्रानिक उत्पाद, कृषि, मीट, इंजीनियरिंग और निर्माण सामग्री सहित विभिन्न प्रकार के उत्पादों का निर्यात किया जाता है। उत्तर प्रदेश के निर्यातकों की नजरें फिलहाल अगले कुछ दिनों पर टिकी हैं।
डेवलपमेंट काउंसिल फार फुटवियर एंव लेदर के अध्यक्ष पूरन डाबर और काउंसिल फार लेदर एक्सपोर्ट के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद कमल इराकी के अनुसार खाड़ी देशों को ईद के मद्देनजर खाद्य सामग्री का निर्यात फिलहाल सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है, कंटेनर रास्ते में फंसे हैं।
शिपिंग कंपनियां सही स्थिति नहीं बता रही हैं। गर्मियों के मद्देनजर संबंधित उत्पादों का निर्यात का चक्र पूरा किया जा चुका है। जून-जुलाई में सर्दियों से संबंधित उत्पादों का निर्यात किया जाना है, अगर तनाव दो से तीन माह लंबा खिंचा तो निर्यात का चक्र प्रभावित होगा।
फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन्स (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि पश्चिम एशियाई देशों में तनाव का उत्तर प्रदेश पर दोहरा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि उत्तर प्रदेश से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों की आपूर्ति बड़ी चुनौती बनेगी।


