लोक निर्माण विभाग ने विभागीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। टेंडर में अत्यधिक कम दर कोट करके कार्य पाने वाले ठेकेदार द्वारा विभाग में कराए जा रहे उस कार्य की जांच विभागीय टीम करेगी, जिसका अनुबंध सबसे कम दर पर हुआ है।
वर्तमान में कोई कार्य नहीं कराए जाने की स्थिति में विशेष आदेश के तहत उसके द्वारा पूर्व में कराए गए कार्यों की जांच होगी।गुणवत्ता खराब पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार को नोटिस देने के साथ ही उसे दो साल के लिए डिबार किया जाएगा।
ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद विभाग संबंधित कार्य के लिए दूसरा टेंडर निकालेगा।
पीडब्ल्यूडी के विभागाध्यक्ष एके द्विवेदी ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव जारी करते हुए 15 दिनों के अंदर संबंधित हित धारकों (स्टेक होल्डर्स) जैसे ठेकेदार, इंजीनियर व डिप्लोमा इंजीनियर संगठनों के साथ ही अन्य हित धारकों से सुझाव मांगे हैं।
विभागाध्यक्ष के मुताबिक अत्यधिक कम दरों पर प्राप्त निविदाओं के कारण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में पारदर्शी, व्यावहारिक एवं उत्तरदायी प्रक्रिया के निर्धारण के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे विभागीय कार्यों में पारदर्शिता आएगी और गुणवत्ता बेहतर होगी।
जो सुझाव आएंगे उसके आधार पर एक प्रभावी और व्यावहारिक प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी।
प्रस्ताव में लिखा है कि प्रतिस्पर्धा के कारण कई ठेकेदार जान बूझकर अनुमानित लागत से बहुत कम दरों पर कार्य हासिल कर लेते हैं। जिससे परियोजना का कार्य विलंब से होने, कानूनी विवाद व अन्य दिक्कतें आती हैं।
पांच करोड़ रुपये से कम लागत और पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत के कार्यों में 10 प्रतिशत से कम दरों पर प्राप्त निविदाओं में अनुमानित लागत व निविदा लागत के अंदर के आधार पर अतिरिक्त परफार्मेंस सिक्योरिटी जमा कराने का प्रविधान लागू होगा। वहीं 15 प्रतिशत से कम दरों पर प्राप्त निविदाओं में ठेकेदार द्वारा विभाग में निर्माणाधीन एक कार्य का चयन जांच के लिए किया जाएगा, जिसका अनुबंध सबसे कम दर पर हुआ है।


