हरा-भरा पहाड़ियों के बीच बसा गोमो रेलवे स्टेशन केवल एक रेल जंक्शन नहीं बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे रहस्यमय और साहसिक अध्याय का साक्षी है। इसी स्टेशन से 18 जनवरी 1941 की आधी रात नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंग्रेजी हुकूमत को चकमा देकर कालका मेल पकड़कर देश से बाहर निकलने की ऐतिहासिक यात्रा शुरू की थी।
नेताजी उस रात प्लेटफार्म संख्या दो-एक से हावड़ा–कालका मेल (वर्तमान नेताजी एक्सप्रेस) में सवार होकर पेशावर के लिए रवाना हुए। यह घटना स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक साहसिक मोड़ के रूप में दर्ज है।
85 वर्षों से अधिक समय बीतने के बाद भी नेताजी के अंतिम ठिकाने को लेकर रहस्य बरकरार है। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में गोमो रेल नगरी में हर वर्ष 18 जनवरी को “महा निष्क्रमण दिवस” के रूप में मनाया जाता है।


