गोसी और बड़गांव के सीमावर्ती क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध गंधौरिया धाम में 15 जनवरी को आयोजित होने वाला पारंपरिक पूजा एवं टुसू मेला इस वर्ष नहीं होगा। इसकी वजह क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही और बढ़ता खतरा बताया गया है। पूजा समिति ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है।
सौ वर्ष पुरानी परंपरा पर पहली बार विराम
लगभग सौ वर्षों से चली आ रही परंपरा पर यह पहला अवसर है जब गंधौरिया धाम में पूजा और मेला का आयोजन स्थगित किया गया है। समिति का कहना है कि हाथियों की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं, जिससे किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस निर्णय से क्षेत्र के श्रद्धालुओं में गहरी निराशा देखी जा रही है।
दर्जनों गांवों के श्रद्धालु होते थे शामिल
हर वर्ष इस पूजा व मेला में लईयो, केदला, गोसी, बड़गांव, बदगांव, तितिरमरवा, तिलैया, दनिया और बिहार के जगेसर सहित दर्जनों गांवों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते थे। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पूजा समिति के तत्वावधान में भव्य मेले का आयोजन होता था, जिसमें पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहता था।
गर्म जल कुंड था श्रद्धा का प्रमुख केंद्र
गंधौरिया धाम स्थित गर्म जल कुंड श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र माना जाता रहा है। श्रद्धालु यहां स्नान कर पूजा में भाग लेते थे और इसे गहरी धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते थे। मेला के दौरान यह स्थल श्रद्धालुओं से पूरी तरह भरा रहता था।
तीन माह से धाम की ओर नहीं जा रहे ग्रामीण
हाथियों के भय की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन महीनों से ग्रामीण गंधौरिया धाम और आसपास के जंगल क्षेत्र की ओर जाने का साहस नहीं कर पा रहे हैं। लगातार बनी इस स्थिति के कारण पूजा समिति को आयोजन स्थगित करने का कठोर निर्णय लेना पड़ा।

