भारत-नेपाल सीमा के माध्यम से पौधों, पादप उत्पादों और अन्य विनियमित वस्तुओं की अवैध तस्करी को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने इसे कृषि, वानिकी और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताते हुए संबंधित विभागों को तुरंत और कड़ाई से कार्रवाई के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अवैध तस्करी के चलते विदेशी कीट, रोग और अन्य हानिकारक तत्वों का खतरा बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह प्लांट क्वारंटाइन (भारत में आयात का विनियमन) आदेश-2003 और विनाशकारी कीट एवं रोग अधिनियम-1914 का स्पष्ट उल्लंघन है। इससे फफूंद, जीवाणु, विषाणु, नेमाटोड और खरपतवार बीजों के प्रवेश का खतरा रहता है, जो स्थानीय कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित छानबीन और सघन निगरानी करें। साथ ही, किसी भी प्रकार की अवैध तस्करी पकड़े जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

