भारतीय सेना अपने तोपखाने की मारक क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की ओर बढ़ रही है। सेना जल्द ही रैमजेट इंजन से लैस 155 मिमी आर्टिलरी शेल्स को अपने हथियारों के जखीरे में शामिल करने जा रही है। इसके साथ ही भारत यह तकनीक अपनाने वाली दुनिया की पहली सेना बन जाएगी।
रैमजेट इंजन वाले इन उन्नत गोलों के इस्तेमाल से तोपों की रेंज में 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी। इतना ही नहीं, ये गोले लक्ष्य पर अधिक गति और ऊर्जा के साथ पहुंचकर दुश्मन के ठिकानों पर कहीं ज्यादा तबाही मचाने में सक्षम होंगे।
यह अत्याधुनिक तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है, जिसे आईआईटी मद्रास और भारतीय सेना ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
हाल ही में राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में इन रैमजेट इंजन वाले गोले के सफल ट्रायल किए गए। परीक्षण के दौरान इन गोलों ने लंबी दूरी, स्थिर उड़ान और सटीक निशानेबाजी में अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए सकारात्मक परिणाम दिए।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, तकनीक के पूरी तरह विकसित और प्रमाणित हो जाने के बाद इन गोलों का इस्तेमाल भारतीय सेना के तोपखाने में शामिल सभी प्रकार की 155 मिमी तोपों से किया जा सकेगा। इससे सीमावर्ती इलाकों में सेना की फायरपावर और स्ट्राइक कैपेबिलिटी में बड़ा इजाफा होगा।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि रैमजेट तकनीक से लैस आर्टिलरी शेल्स भारत को आधुनिक युद्ध क्षमता में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे और दुश्मन पर निर्णायक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

