गंगा कटाव और आदिवासी शिक्षा, सांसद पप्पू यादव का केंद्र सरकार से तीखा सवाल

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पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने एक बार फिर लोकसभा के माध्यम से बिहार और विशेषकर पूर्णिया-सीमांचल क्षेत्र से जुड़े गंभीर जनहित मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से उठाया है।

उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय (जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग) तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय को पत्र लिखकर गंगा नदी के कटाव और आदिवासी शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं।

इन सवालों के जवाब में केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया के साथ-साथ राज्य सरकार की उदासीनता भी सामने आई है। सांसद पप्पू यादव ने जल शक्ति मंत्री से पूछा कि क्या सरकार को जानकारी है कि बिहार में कुरसेला से मनिहारी तक गंगा नदी के किनारे बसे कई गांव हालिया बाढ़ और कटाव के कारण बह गए हैं।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या केंद्र सरकार ने गंगा किनारे कटाव-प्रवण स्थलों की पहचान की है और आगे कटाव रोकने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनाई गई है। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान बाढ़ नियंत्रण, कटाव-रोधी और जल निकासी विकास के लिए बाढ़ प्रबंधन कार्यक्रम (एफएमपी) लागू किया गया था, जिसे बाद में बाढ़ प्रबंधन एवं सीमा क्षेत्र कार्यक्रम (एफएमबीएपी ) के अंतर्गत जारी रखा गया।

सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत कुल 48 बाढ़ प्रबंधन परियोजनाएं शामिल की गई हैं, जिनकी अनुमानित लागत 1866.50 करोड़ रुपये है। इसमें से 924.40 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता बिहार सरकार को जारी की जा चुकी है।

हालांकि, सबसे अहम बात यह सामने आई कि कुरसेला से मनिहारी तक गंगा कटाव नियंत्रण के लिए बिहार सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव केंद्र को प्राप्त ही नहीं हुआ है।

राज्य सरकार की उदासीनता पर जताई नाराजगी

इस पर सांसद पप्पू यादव ने राज्य सरकार की उदासीनता पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब गांव के गांव गंगा में समा रहे हैं, लोग बेघर हो रहे हैं, तब राज्य सरकार का प्रस्ताव तक न भेजना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और जनविरोधी है।

उन्होंने कहा कि इसका सीधा खामियाजा पूर्णिया, कटिहार और सीमांचल क्षेत्र के हजारों परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
आदिवासी शिक्षा पर भी उठाई मजबूत आवाज

सांसद पप्पू यादव ने जनजातीय कार्य मंत्रालय से भी बिहार, खासकर पूर्णिया और आसपास के जिलों में आदिवासी शिक्षा को लेकर अहम सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या भागलपुर जिले में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित करने का कोई प्रस्ताव है और यदि है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।

साथ ही यह भी सवाल उठाया कि यदि ऐसा कोई विद्यालय प्रस्तावित नहीं है, तो अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा देने के लिए सरकार की वैकल्पिक योजना क्या है। उन्होंने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि पूर्णिया, बांका, जमुई, मुंगेर और कैमूर जैसे जिलों में अनुसूचित जनजाति की बड़ी आबादी होने के बावजूद अब तक वहां एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित नहीं किए गए हैं।

दोहरी मार झेल रही पूर्णिया

पप्पू यादव ने कहा कि पूर्णिया और सीमांचल आज दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर गंगा और कोसी जैसी नदियों का कटाव और बाढ़, दूसरी ओर शिक्षा और विकास के अवसरों की भारी कमी। उन्होंने साफ कहा कि केंद्र सरकार योजनाओं का दावा करती है, लेकिन राज्य सरकार की निष्क्रियता के कारण उनका लाभ जमीन तक नहीं पहुंच पा रहा है।

सांसद ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर गंगा कटाव और आदिवासी शिक्षा जैसे मुद्दों पर शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वह इसे केवल संसद तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि सड़क से सदन तक संघर्ष करेंगे। उन्होंने दोहराया कि पूर्णिया की जनता की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा, चाहे इसके लिए कितनी भी राजनीतिक लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।

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