100 रुपये रिश्वत के झूठे मामले ने जीवन कर दिया अस्त-व्यस्, 39 वर्ष बाद मिला न्याय; अब पेंशन के लिए संघर्ष

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100 रुपये रिश्वत के झूठे आरोप ने 83 वर्षीय जागेश्वर प्रसाद अवधिया का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। 1986 में उन पर रिश्वत लेने का मामला दर्ज हुआ, जिसके कारण वे छह वर्ष तक निलंबित रहे और उनका प्रमोशन-इंक्रीमेंट रुक गया।

39 वर्ष लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें निर्दोष करार दिया, लेकिन इसके बाद भी उनकी समस्याएं समाप्त नहीं हुईं। उन्होंने 29 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम (सीआइडीसी) के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर सस्पेंशन अवधि की कटी सैलरी, पेंशन और अन्य लंबित भुगतान लगभग 30 लाख रुपये की मांग की।

विभागीय अधिकारी पिछले तीन महीने से उन्हें सर्विस बुक न मिलने का बहाना बनाकर टालते जा रहे हैं। सीआइडीसी का तर्क है कि अवधिया 2001 में मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी थे, इसलिए भुगतान मध्य प्रदेश से होना चाहिए।

हालांकि, 2004 में सीआइडीसी ने उनके रिटायरमेंट से जुड़ी राशि जारी की थी। 21 नवंबर 2025 को मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम ने स्पष्ट किया कि जागेश्वर अवधिया सीआइडीसी के कर्मचारी हैं।

अवधिया ने बताया कि निलंबन के कारण उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई और पत्नी का तनाव में आकर निधन हो गया। अब 83 वर्ष की उम्र में भी वे विभाग के चक्कर काट रहे हैं। छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम के एमडी राजेश सुकुमार टोप्पो का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं जारी हैं और दस्तावेजों के एकत्र होने के बाद भुगतान किया जाएगा।

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