Onir: फिल्मों से LGBTQ कम्यूनिटी को किया सपोर्ट, जीता नेशनल अवॉर्ड, दुनियाभर में लहराया भारत का परचम

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 भारतीय फिल्म और टेलीविजन निर्देशक और राइटर ओनिर (अनिरबन धर) को भारतीय सिनेमा में LGBTQ कम्यूनिटी को मैनस्ट्रीम सिनेमा से जोड़ने का श्रेय दिया जाता है। इसी विषय पर बनी उनकी फिल्म ‘माई ब्रदर…निखिल’ एड्स और समलैंगिक संबंधों पर ही बनी है, यह डोमिनिक डिसूजा की जिंदगी को दिखाती है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी फिल्म ‘आई एम’ के लिए नेशनल अवॉर्ड तक जीता। उनके सम्मान में ही एक खास कम्यूनिटी इवेंट होस्ट किया गया जिसमें फिल्मों में उनके योगदान को सेलिब्रेट किया गया।

फिल्मों से LGBTQ कम्यूनिटी को किया सपोर्ट

ओनिर का जन्म भूटान के साम्ची में अनिरबन धर के रूप में हुआ था, उनके माता-पिता बंगाल से हैं। उन्होंने अपना ज्यादातर जीवन सिनेमा देखने में ही बिताया। जब वे फैमिली के साथ कोलकाता शिफ्ट हो गए तब उन्होंने अपने इस जुनून को करियर बनाया। ओनिर ने कई बेहतरीन फिल्में भारतीय सिनेमा को दी हैं लेकिन उनकी दो फिल्में मेरा भाई…निखिल और आई एम को खूब सराहा गया। आई एम को नेशनल अवॉर्ड समेत कई और पुरुस्कार भी मिले।

ओनिर की फिल्मों को मिली सराहना

शाम को एक यादगार पल के तौर पर मनाया गया जब लिविंगस्टन के मेयर एड मीनहार्ट और काउंसिल मेंबर केतन भूपटानी ने फिल्म के जरिए विजिबिलिटी, इक्वालिटी और कम्पैशन को बढ़ावा देने में उनके शानदार काम को पहचान देते हुए ओनिर को एक ऑफिशियल टाउनशिप साइटेशन दिया। मेयर मीनहार्ट ने ओनिर की तारीफ करते हुए कहा, ‘एक सच्चे ट्रेलब्लेजर जिनकी हिम्मत और क्रिएटिविटी ने दुनिया भर के दर्शकों को इंस्पायर किया है और कहा कि ‘लिविंगस्टन के लिए एक ऐसे विजनरी को होस्ट करना सम्मान की बात है जो हमें याद दिलाता है कि इंसानियत तब सबसे ज्यादा चमकती है और मायने रखती है, जब वह डाइवर्सिटी को सेलिब्रेट करती है’।इवेंट की शुरुआत इंडियंस इन लिविंगस्टन (IIL) और Bakstage.AI के फाउंडर शशांक सिंह की बातों से हुई, सिंह ने कहा, ‘ओनिर की फिल्मों ने अनगिनत जिंदगियों को छुआ है और उनकी कहानी कहने का तरीका दुनिया भर के कल्चर और बातचीत को जोड़ता रहता है’।

मेनस्ट्रीम सिनेमा को दी नई दिशा

यह अवॉर्ड ओनिर को कनाडा के इंटरनेशनल साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल में आइकन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह अवॉर्ड उन्हें लगातार ऐसे सिनेमा के लिए मिला है जो सीमाओं को तोड़ता है, कम प्रतिनिधित्व वाली आवाजों को सामने लाता है, और उन मुद्दों पर बातचीत शुरू करता है जो अक्सर मेनस्ट्रीम से बाहर रह जाते हैं।

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