ढाई साल में मां-बाप की हत्या, पाकिस्तानी फैन से शादी…बॉलीवुड की पहली कॉमेडी क्वीन Tun Tun की दर्दभरी कहानी

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1940s का दौर था, परिवार से सताई हुई एक सीधी-साधी लड़की सिंगर बनने मुंबई आ गई। ख्वाब बड़े थे और उन्हें पूरा करने की जिद्द भी थी। सिंगिंग डेब्यू करने के लिए वह एक डायरेक्टर के घर के बाहर धरना लेकर बैठ गई और साफ-साफ कह दिया कि अगर एक चांस नहीं मिला तो समंदर में कूद जाएंगी। थक हारकर डायरेक्टर ने मौका दिया और उनकी आवाज डायरेक्टर के दिल को ऐसी छुई कि उसी वक्त अपनी फिल्म में कास्ट कर लिया।

बड़ी-बड़ी फिल्मों में गाने गाए, सुरैया के साथ ड्युट भी किया। फिर जब लगा कि लता मंगेशकर जैसी दिग्गज सिंगर्स के सामने करियर अच्छा नहीं जा रहा है तो हार मानने की बजाय अभिनय में कदम रख लिया और यहां से शुरू हुआ सिनेमा की पहली कॉमेडी क्वीन बनने का सफर।

निजी जिंदगी में चाहे जितने दर्द हों, लेकिन बड़े पर्दे पर अपनी कॉमिक टाइमिंग से उन्होंने दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर दिया। चंद मिनट्स के रोल में भी हीरो हीरोइन से ज्यादा सुर्खियां खुद बटोर ले जाती थीं। बिना डायलॉग डिलीवरी के भी वो महज अपने एक्सप्रेशन से दर्शकों का ध्यान खींचने में अव्वल थीं।

बचपन में माता-पिता और भाई की हुई हत्या

हम जिस सिंगर और अभिनेत्री की बात कर रहे हैं, वो हैं 11 जुलाई 1923 को अमरोहा के एक गांव में जन्मीं उमा देवी खत्री (Uma Devi Khatri) जिन्हें बॉलीवुड में टुन टुन (Tun Tun) के नाम से जाना जाता है। वह सिर्फ ढाई साल की थीं, जब संपत्ति विवाद के चलते उनके माता-पिता और भाई की हत्या कर दी गई थी। एक बार फिल्म क्रिटिक शिशिर कृष्ण शर्मा के साथ बातचीत में टुन टुन ने इस बारे में बताया था-

टुन टुन ने बताया कि माता-पिता और भाई की मौत के बाद उन्हें रिश्तेदारों के यहां छोड़ दिया गया था, जहां दो वक्त की रोटी के लिए उनके साथ एक नौकरानी की तरह बर्ताव किया जाता था।

रिश्तेदारों ने ढहाया कॉमेडियन पर जुल्म

टुन टुन बचपन से सिंगर बनना चाहती थीं। मगर घर में उन्हें गाने की इजाजत नहीं थी। रिश्तेदार मारते-पीटते। रिश्तेदारों की प्रताड़ना से तंग आकर वह मुंबई भागकर आ गईं और सीधे जाने-माने म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद अली (Naushad Ali) के घर पहुंच गई हैं। यह वही, नौशाद हैं जिन्हें टुन टुन ने धमकी दी थी कि अगर वह उन्हें चांस नहीं देंगे तो वह समंदर में कूद जाएंगी। यहीं से उनका सिंगिंग करियर शुरू हुआ।

पाकिस्तानी फैन से रचाई शादी

टुन टुन का सबसे यादगार गाना ‘अफसाना लिख रही हूं’ (Afsana Likh Rahi Hoon) है जिससे वह मशहूर हो गई थीं। फिर उन्होंने सुरैया के साथ ड्युट गाना ‘बेताब है दिल दर्द ए मोहब्बत के असर से’ जैसे गाने गाए। जब सिंगिंग में वह सफल हुईं तब उनके लिए पाकिस्तान से एक शख्स आया जिनका नाम अख्तर अब्बास काजी (Akhtar Abbas Kazi) था। यह वही शख्स थे जो कभी टुन टुन की मदद करना चाहते थे, लेकिन फिर बंटवारे के बाद लाहौर चले गए। मगर जब टुन टुन सिंगर बनीं तो उनकी आवाज ने उनके दिल में ऐसा घर किया कि वह उनके पास मुंबई खिंचे चले आए। फिर दोनों ने शादी कर ली थी। उमा उन्हें मोहन बुलाती थीं। उनके चार बच्चे हुए।

सिंगिंग छोड़ बन गईं एक्ट्रेस

टुन टुन ने शादी के बाद सिंगिंग करियर से किनारा कर लिया था, लेकिन पैसों की तंगी उन्हें फिर इंडस्ट्री में खींच लाई। कहा जाता है कि जब उन्होंने सिंगिंग में वापसी करने का मन बनाया, तब तक लता मंगेशकर समेत कई दिग्गज गायिकाओं का इंडस्ट्री पर राज था। ऐसे में उनके बीच सफलता के चांसेस कम थे। तब एक बार फिर नौशाद ने उनकी मदद की और उन्हें एक्टिंग करने की सलाह दी।

दिलीप कुमार ने रखा था एक्ट्रेस का नाम टुन टुन

नौशाद ने ही दिलीप कुमार को मनाया कि वह उन्हें अपनी फिल्म में कास्ट करें। फिर क्या था, दिलीप ने अपनी फिल्म बाबुल (Babul) में उन्हें कास्ट किया और यहां से शुरू हुआ महिला कॉमेडियन का दौर। बहुत कम लोग जानते हैं कि उमा देवी को टुन टुन बनाने का श्रेय दिलीप कुमार (Dilip Kumar) को जाता है, क्योंकि उन्होंने एक्ट्रेस को यह नाम दिया था और आज लोग मोटी लड़कियों को इसी नाम से बुलाते हैं।

खैर, टुन टुन सिंगिंग करियर से ज्यादा कॉमिक टाइमिंग के लिए पसंद की जाने लगीं। वह आर पार, मिसेस एंड मिस्टर, 55, नमक हलाल, प्यासा, कुलू और पैंटर बाबू समेत कई फिल्मों में अपनी कॉमेडी से दिल जीतती रहीं। उन्होंने करीब 40 दशक तक करीब 200 फिल्मों में काम किया। 23 नवंबर 2003 को मुंबई में 80 साल की उम्र में टुन टुन का निधन हो गया था।

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