छठ पूजा का वो अमर गीत, जिसे शारदा सिन्हा की आवाज ने बनाया खास; अर्घ्य देते समय आज भी गूंजते हैं उनके मधुर सुर
लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का जिक्र हो और स्वर कोकिला शारदा सिन्हा के गीतों की बात न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। छठ के मौके पर उनके गाए गीत आज भी घरों से लेकर घाटों तक सुनाई देते हैं। खासकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते समय महिलाएं उनके मधुर गीतों को गुनगुनाती नजर आती हैं। इन्हीं गीतों में एक ऐसा छठ गीत भी है, जिसने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई और आज अमर हो चुका है।
शारदा सिन्हा की आवाज में छठ के पारंपरिक गीतों की खास पहचान रही है। उनकी गायकी में लोक संस्कृति, आस्था और छठ महापर्व की भावनाओं का सुंदर संगम देखने को मिलता है। यही वजह है कि उनके गीत केवल बिहार और पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहे, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले छठ व्रतियों के बीच भी लोकप्रिय हुए।
छठ पूजा के दौरान जब व्रती महिलाएं डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं, तब घाटों पर शारदा सिन्हा के गीतों की गूंज पर्व के माहौल को और भी भक्तिमय बना देती है। उनकी आवाज में मौजूद मिठास और भावपूर्ण प्रस्तुति ने इन गीतों को पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के दिलों में जगह दिलाई है।
शारदा सिन्हा ने अपने संगीत के जरिए छठ महापर्व की परंपराओं और लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाई। उनके गीत आज भी लोगों को उनकी याद दिलाते हैं। यही कारण है कि छठ पूजा के अवसर पर उनके सुरों के बिना पर्व का संगीत अधूरा-सा महसूस होता है।
भले ही शारदा सिन्हा आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज में गाए छठ गीत हमेशा लोगों की आस्था और भावनाओं का हिस्सा बने रहेंगे।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

