नवानगर थाने में किसका चलता है राज? एसपी कार्यालय का प्रधान आरक्षक बना चर्चा का केंद्र, थाना प्रभारी की मेहरबानी पर सवाल!

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रीवा आईजी के स्थानांतरण आदेश के बावजूद जिले में बना हुआ प्रधान आरक्षक, एनसीएल क्लब के डिनर की चर्चाओं ने भी पकड़ा जोर

सिंगरौली। जिले के नवानगर थाना क्षेत्र में इन दिनों पुलिस विभाग से जुड़े सोशल मीडिया रिल बनाने वाले एक प्रधान आरक्षक को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ बताए जा रहे उक्त प्रधान आरक्षक की नवानगर थाना क्षेत्र में सक्रियता और थाना प्रभारी के साथ कथित नजदीकी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। चर्चाओं में यहां तक कहा जा रहा है कि नवानगर थाना प्रभारी उक्त प्रधान आरक्षक के इशारों पर थाना संचालित कर रहे हैं। जिसकी केवल दबी जुबान में चर्चा चल रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ होने के बावजूद संबंधित प्रधान आरक्षक की नवानगर थाना क्षेत्र में लगातार सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। क्षेत्र में कथित अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों तक उक्त प्रधान आरक्षक की पहुंच होने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ प्रधान आरक्षक की नवानगर थाना क्षेत्र में इतनी सक्रियता क्यों है?

थाना प्रभारी की मेहरबानी या पर्दे के पीछे कोई और व्यवस्था?

नवानगर थाना क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि थाना प्रभारी संबंधित प्रधान आरक्षक पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान नजर आते हैं। आरोपों और चर्चाओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या थाना क्षेत्र की गतिविधियों के संचालन में उक्त प्रधान आरक्षक की कोई विशेष भूमिका है? क्या थाना प्रभारी अपने अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं या फिर किसी अन्य के कथित इशारों पर थाना संचालन की चर्चाएं महज संयोग हैं? यदि इन चर्चाओं में कोई तथ्यात्मक आधार है, तो यह पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है।

एनसीएल क्लब के डिनर की चर्चा?

नवानगर थाना प्रभारी और संबंधित प्रधान आरक्षक के बीच कथित नजदीकी को लेकर चर्चाओं के साथ एनसीएल क्लब में डिनर को लेकर भी क्षेत्र में खूब बातें हो रही हैं। इस डिनर को लेकर चर्चा भी इस लिए हो रही है कि क्यों कि इस डिनर में केवल 2 लोगों की ही मौजूदगी थी और ये डिनर खुफिया डिनर थी जिसमें प्रभारी और संबंधित प्रधान आरक्षक ही थे।

दो महीने पहले मैहर स्थानांतरण, फिर भी सिंगरौली में कैसे?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल संबंधित प्रधान आरक्षक के स्थानांतरण को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि करीब दो महीने पूर्व रीवा आईजी द्वारा उक्त प्रधान आरक्षक का स्थानांतरण सिंगरौली जिले से मैहर जिले के लिए किया जा चुका है। इसके बावजूद संबंधित प्रधान आरक्षक का सिंगरौली जिले में बने रहना चर्चाओं को और हवा दे रहा है।

अब सवाल यह है कि जब स्थानांतरण आदेश जारी हो चुका है, तो संबंधित प्रधान आरक्षक अब तक सिंगरौली में किस आधार पर बना हुआ है? क्या स्थानांतरण आदेश पर अमल नहीं हुआ, क्या कोई प्रशासनिक प्रक्रिया लंबित है या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण है? इन सवालों का जवाब पुलिस विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही सामने आ सकता है।

पुलिस प्रशासन की जवाबदेही पर उठते सवाल

नवानगर थाना क्षेत्र में प्रधान आरक्षक की कथित सक्रियता, थाना प्रभारी की मेहरबानी, अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों तक पहुंच और स्थानांतरण के बावजूद जिले में बने रहने की चर्चाओं ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इन चर्चाओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या संबंधित प्रधान आरक्षक की भूमिका, स्थानांतरण आदेश के अनुपालन तथा नवानगर थाना संचालन को लेकर कोई जांच या स्पष्टीकरण सामने आता है? फिलहाल नवानगर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं।

शेष अगले अंक में..

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