दीवाली से पहले चांदी की कीमतों ने भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इस साल जनवरी में जिस चांदी को खरीदने के लिए निवेशकों में होड़ मची थी और भाव ₹4.2 लाख प्रति किलो के करीब पहुंच गया था।
सवाल है कि क्या बाजार में भाव सस्ता देखकर खरीदारी करना समझदारी है, या फिर आने वाले दिनों में यह चमक और फीकी पड़ने वाली है? और सबसे जरूरी सवाल है कि आखिर चांदी के दाम कहां तक टूट सकते हैं?
इसे लेकर जागरण बिजनेस ने सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट इंद्र कमल तिवारी से खास बातचीत की और इस मंदी के पीछे का पूरा गणित भी समझा।
COMEX और MCX पर कितनी सस्ती हो चुकी चांदी?
ग्लोबल मार्केट में चांदी की कीमत एक साल के लो लेवल पर पहुंच गई है। कॉमेक्स पर चांदी 50 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार (silver rate today comex) कर रही है। जबकि नवंबर 2025 को चांदी की कीमत 49 डॉलर के ऊपर थी। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी दिसंबर 2025 के बाद लो लेवल पर पहुंच गई है। आज, 30 अक्टूबर को चांदी 1,85,450 रुपए (silver price today mcx) के लेवल पर पहुंच गई। इसमें 2% यानी 3881 रुपए तक की भारी गिरावट दर्ज हुई।
बाजार में किसी जिंस का भाव सस्ता दिखना और उसका निचला स्तर यानी बॉटम बन जाना, दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं। तकनीकी चार्ट्स पर फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं दिख रहा है कि बाजार में खरीदार वापस लौटे हों। जब तक चांदी साप्ताहिक आधार पर ₹2,00,000 और ₹2,05,000 के ऊपर टिककर (silver price outlook) बंद नहीं होती, तब तक कमजोरी और मंदी का रुख ही हावी रहेगा।
ऐसे कौन से 5 कारण हैं, जिनके चलते चांदी और अधिक क्रैश हो सकती है?
इंद्र कमल तिवारी: इसके पीछे मुख्य रूप से 5 कारण हैं।
- डिसेंडिंग ट्रायंगल का टूटना: मार्च से अक्टूबर के बीच बना मंदी का पैटर्न यानी डिसेंडिंग ट्रायंगल की अहम नेकलाइन अब टूट चुकी है।
- लोअर हाई की सीढ़ी: चांदी के उछाल का ग्राफ लगातार नीचे आ रहा है (जनवरी में ₹4.2 लाख, मई में ₹3.05 लाख और सितंबर में ₹2.45 लाख), जो गिरते ट्रेंड को दिखाता है।
- फिबोनाची स्तर का हाथ से जाना: तेजी की आखिरी मजबूत ढाल माना जाने वाला 0.786 फिबोनाची स्तर (₹1,99,330) भी अब पार नहीं हो पाया है।
- भारी वॉल्यूम के साथ बिकवाली: गिरावट के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर है, जो साफ संकेत देता है कि बड़े खिलाड़ी अपनी पोजीशन खाली कर रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों का दबाव: ग्लोबल मार्केट में चांदी 50 डॉलर के करीब संघर्ष कर रही है और सोना भी 4,000 डॉलर के नीचे फिसल गया है, जिससे पूरे बुलियन मार्केट पर भारी दबाव बना हुआ है।

सवाल 4: चांदी में गिरावट के बीच निवेशक किन बातों को ध्यान में रखें?
इंद्र कमल तिवारी: गिरती कीमत देख निवेशकों के मन में सवाल आता है कि “इतनी सस्ती तो फिर नहीं मिलेगी”। और यही सोचकर निवेशक बाजार में पैसा लगा लेते हैं। चार्ट में नीचे का स्तर तभी मायने रखता है, जब कीमत वहां टिककर दिखाए। इसलिए जल्दबाजी की जगह पुष्टि का इंतजार करना ज्यादा समझदारी होती है।
वायदा बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए जोखिम काफी ज्यादा है। इस साल चांदी में एक ही सत्र के दौरान हजारों रुपए का भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। ऐसे में बिना ‘स्टॉप लॉस’ के कोई भी पोजीशन लेना आपके लिए भारी पड़ सकता है।
लंबे समय के निवेशकों के लिए यह सलाह है कि वे अपने पोर्टफोलियो में चांदी का हिस्सा सीमित रखें और एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय किस्तों में निवेश का फैसला लें, जो ज्यादा सुरक्षित तरीका साबित हो सकता है।
आज वही चांदी लुढ़ककर ₹1.85 लाख के आसपास आ चुकी है। 29 जनवरी 2026 के ऑल टाइम से चांदी ₹2,35,000 रुपए सस्ती (silver price crash) हो चुकी है। करीब 56% की इस भयानक गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

