श्रीनगर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने न्यायपालिका की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की उस टिप्पणी के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए निर्वाचन आयोग के संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी है।
महबूबा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अदालती कार्यवाही के दौरान कई बार महत्वपूर्ण टिप्पणियां की जाती हैं, लेकिन अंतिम फैसला आने पर उसका रुख उन टिप्पणियों से अलग दिखाई दे सकता है। उन्होंने पिछले एक दशक के दौरान न्यायपालिका द्वारा कथित तौर पर अदालत की अवमानना से जुड़े मामलों को सामान्य रूप से लिए जाने का भी आरोप लगाया।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग के संशोधित फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही चर्चा में है। महबूबा ने इसी संदर्भ में अदालत की सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों और अंतिम निर्णय के बीच अंतर का मुद्दा उठाया है।
महबूबा मुफ्ती के बयान के बाद न्यायिक टिप्पणियों और अंतिम फैसलों के बीच अंतर को लेकर राजनीतिक बहस फिर चर्चा में आ गई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

