नए आपराधिक कानूनों को लागू करने और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने के मामले में हरियाणा ने बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। ई-समन प्रणाली के इस्तेमाल से राज्य में महज छह महीने के दौरान 25.65 करोड़ रुपये की बचत होने की जानकारी सामने आई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है।
दरअसल, नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद पुलिस और न्यायिक व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में ई-समन प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके माध्यम से समन को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाता है।
पारंपरिक व्यवस्था में समन की तामील के लिए दस्तावेज तैयार करने, उन्हें संबंधित स्थान तक पहुंचाने और कर्मचारियों की आवाजाही पर खर्च होता है। डिजिटल प्रणाली के इस्तेमाल से इस प्रक्रिया में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत की संभावना बढ़ती है। हरियाणा में ई-समन के जरिए छह महीने में 25.65 करोड़ रुपये की बचत का आंकड़ा इसी डिजिटल बदलाव की ओर संकेत करता है।
नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में तकनीकी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल पुलिस, अभियोजन और न्यायालयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद कर सकता है। इससे मामलों की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने और अनावश्यक देरी कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
हालांकि, डिजिटल व्यवस्था की सफलता के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि समन सही व्यक्ति तक पहुंचे, उसकी तामील का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे और संबंधित व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया के तहत उचित सूचना मिले। तकनीक के साथ-साथ कानूनी नियमों और नागरिकों के अधिकारों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
हरियाणा में ई-समन प्रणाली से हुई बचत का यह आंकड़ा सरकारी कामकाज में डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को दर्शाता है। यदि ऐसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग और न्यायिक प्रक्रियाओं में सुधार संभव हो सकता है।
अब इस उपलब्धि के साथ नजर इस बात पर रहेगी कि डिजिटल प्रणाली का विस्तार किस तरह होता है और इससे पुलिस तथा न्यायालयों के कामकाज में आगे क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

