कहते हैं कि गुरु और शिष्य का रिश्ता समय के साथ कभी पुराना नहीं होता। सालों बीत जाते हैं, जिंदगी की राहें बदल जाती हैं, लेकिन शिक्षकों से मिली सीख और कॉलेज के दिनों की यादें हमेशा दिल में बनी रहती हैं। इसकी खूबसूरत मिसाल उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय यानी BHU में देखने को मिली, जहां वनस्पति विज्ञान विभाग के पुरा छात्र करीब पांच दशक बाद एक बार फिर अपने पुराने शिक्षकों और सहपाठियों से मिले।
एमएससी वनस्पति विज्ञान के 1976 से 1978 बैच के पूर्व विद्यार्थियों ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के 50 वर्ष पूरे होने पर गोल्डन जुबली मिलन समारोह आयोजित किया। इस खास मौके पर विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों को सम्मानित किया और पुराने दिनों की यादें साझा कीं।
पांच दशक बाद फिर सजी यादों की महफिल
वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में 28 अक्टूबर 2026 को पुरा छात्र मिलन समारोह आयोजित किया गया। विभाग के समिति कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में एमएससी वनस्पति विज्ञान के 1976–1978 बैच के पूर्व विद्यार्थी शामिल हुए।
करीब 50 वर्ष बाद एक साथ जुटे इन पूर्व छात्रों के लिए यह अवसर केवल मुलाकात तक सीमित नहीं था, बल्कि अपने शैक्षणिक जीवन की पुरानी यादों को दोबारा जीने का भी मौका था। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में बिताए समय, पढ़ाई के अनुभवों और अपने व्यावसायिक जीवन के सफर को एक-दूसरे के साथ साझा किया।
पुराने शिक्षकों को किया सम्मानित
समारोह का सबसे भावुक और खास पहलू उन शिक्षकों का सम्मान रहा, जिन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उनके जीवन को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई थी।
पूर्व छात्रों ने अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया और उनके योगदान को याद किया। विद्यार्थियों के लिए यह अवसर अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का था।
शिक्षकों का मार्गदर्शन और उनके द्वारा दिए गए संस्कार विद्यार्थियों के जीवन में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजन इसी रिश्ते की अहमियत को सामने लाते हैं।
विभाग के लिए भी खास रहा आयोजन
वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर आर.पी. सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि विभाग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के 50 वर्ष बाद पुरा छात्रों का मिलन समारोह आयोजित होना एक विशेष अवसर है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम पूर्व विद्यार्थियों को अपने शिक्षकों और सहपाठियों से दोबारा जुड़ने का अवसर देते हैं। साथ ही, पुरानी यादों, अनुभवों और आत्मीय संबंधों को साझा करने का मौका भी मिलता है।
स्मृतियों पर आधारित प्रस्तुति और स्मारिका का विमोचन
कार्यक्रम में बैच की शैक्षणिक यात्रा पर आधारित चित्रात्मक प्रस्तुति भी दिखाई गई। इसमें विद्यार्थियों ने अपने अध्ययन काल और उसके बाद के व्यावसायिक जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए।
इस अवसर पर साझा स्मृतियों पर आधारित एक स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इससे समारोह को यादगार बनाने के साथ पुराने साथियों की यात्रा और उनके अनुभवों को संजोने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. पी.के. नंदी, डॉ. मधूलिका अग्रवाल, वी.के. दीक्षित, डॉ. टी.के. चौधरी, पी.वी.एस. राम कृष्ण, योगेंद्र राय, डॉ. जे.ए. खान और के.वी.वी.एस. राजू सहित बैच के पुरा छात्रों ने भाग लिया।
गुरु-शिष्य परंपरा की खूबसूरत मिसाल
आज के तेज रफ्तार दौर में जहां पढ़ाई पूरी करने के बाद विद्यार्थी अपने-अपने कामकाज और जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाते हैं, वहीं पांच दशक बाद इस तरह एकत्र होना गुरु-शिष्य संबंधों की गहराई को दर्शाता है।
BHU का यह आयोजन केवल एक पुरा छात्र मिलन समारोह नहीं, बल्कि उन रिश्तों को फिर से जीवंत करने का अवसर बना, जो समय बीतने के बावजूद अपनी अहमियत बनाए रखते हैं।
निष्कर्ष:
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में आयोजित यह गोल्डन जुबली समारोह पुरानी यादों, गुरुजनों के सम्मान और वर्षों पुराने रिश्तों का प्रतीक बनकर सामने आया। पांच दशक बाद मिले पूर्व विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त कर यह संदेश दिया कि शिक्षा का रिश्ता डिग्री मिलने के साथ समाप्त नहीं होता।
गुरु का ज्ञान और मार्गदर्शन जीवनभर साथ रहता है। BHU के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि समय भले ही बदल जाए, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच सम्मान और अपनापन हमेशा कायम रह सकता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

