हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja 2026) का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। साथ ही इस दिन जरूरतमंदों को विशेष चीजों का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 40 मिनट से 08 बजकर 50 मिनट तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 06 मिनट से 02 बजकर 50 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05 बजकर 57 मिनट से 06 बजकर 13 मिनट तक
निशिता मुहूर्त: रात्रि 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक
पूजा में शामिल करें ये चीजें
गाय का गोबर, फूल, फूल माला, नारियल, प्रसाद के लिए मिठाई, फल और खीर, दूध, दही, शहद, बताशे, चावल, दीपक, गंगाजल, कलश, रोली, घी आदि।
कैसे मनाएं गोवर्धन पूजा?
गोवर्धन पूजा मनाने के लिए सबसे पहले घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं और उसे फूलों से सजाएं। इसके बाद रोली, चावल, फूल, जल, धूप और दीप जलाकर विधिवत पूजा करें। गोवर्धन पर्वत की सात परिक्रमाएं लगाएं और आरती करें। भगवान को छप्पन भोग अर्पित करें। इस दिन गौ माता की पूजा का भी विशेष महत्व है, इसलिए गायों को सजाकर उन्हें चारा खिलाएं। पूजा के अंत में गोवर्धन महाराज से जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

