अंतरराष्ट्रीय समाचार। इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान ने एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति को चर्चा में ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू ने कहा कि वह ईरानी शासन को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बयान से इजरायल की ईरान को लेकर नीति और अमेरिका के साथ उसके समन्वय पर चर्चा तेज हो सकती है।
ट्रंप के साथ ईरान पर हुई चर्चा
20 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ईरानी शासन को हटाने के मुद्दे पर कई बार चर्चा की है। उन्होंने इसे इजरायल का प्रमुख उद्देश्य बताया। हालांकि, नेतन्याहू के बयान से यह स्पष्ट नहीं हुआ कि ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य का समर्थन किया है या नहीं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता
नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व और उसके परमाणु कार्यक्रम को इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। उनका कहना है कि ईरानी शासन के बने रहने से परमाणु क्षमताओं को फिर से विकसित करने और क्षेत्र में सहयोगी सशस्त्र समूहों को मजबूत करने की कोशिशें जारी रह सकती हैं। ये नेतन्याहू के अपने दावे और आकलन हैं।
अमेरिका-इजरायल संबंधों पर सबकी नजर
ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और कूटनीतिक प्रयास दोनों जारी हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग महत्वपूर्ण है, लेकिन ईरान के शासन को बदलने जैसे लक्ष्य पर अमेरिकी प्रशासन की वास्तविक प्रतिबद्धता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
आगे क्या हो सकता है?
नेतन्याहू के बयान के बाद क्षेत्रीय घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। आने वाले समय में अमेरिका की नीति, ईरान के साथ बातचीत और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, केवल इस बयान के आधार पर किसी नए सैन्य अभियान की घोषणा या उसके निश्चित परिणाम का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
निष्कर्ष: ट्रंप से बातचीत का हवाला देते हुए नेतन्याहू ने ईरानी शासन को हटाने के अपने लक्ष्य को दोहराया है। इस बयान ने अमेरिका-इजरायल की रणनीति और पश्चिम एशिया के भविष्य को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

