भारत के बैंकिंग इतिहास में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का एक खास स्थान है। आज देशभर में बैंकिंग सेवाएं देने वाला यह बैंक कभी लाहौर से शुरू हुआ था। इसकी स्थापना का उद्देश्य भारतीय पूंजी और भारतीयों के प्रबंधन से चलने वाला बैंक बनाना था। बैंक ने 12 अप्रैल 1895 को अपना कारोबार शुरू किया था।
लाहौर में रखी गई थी नींव
पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना 19 मई 1894 को लाहौर में हुई थी, जो अब पाकिस्तान में है। इसके पीछे स्वदेशी सोच और भारतीयों द्वारा संचालित वित्तीय संस्थान खड़ा करने का विचार था। बैंक की शुरुआत में अधिकृत पूंजी दो लाख रुपये और कार्यशील पूंजी 20 हजार रुपये थी। उस समय बैंक में केवल नौ कर्मचारी काम करते थे।
लाला लाजपत राय ने भी निभाई अहम भूमिका
स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय इस बैंक के शुरुआती समर्थकों में शामिल थे। उन्होंने बैंक में खाता भी खुलवाया था। बैंक की स्थापना में अलग-अलग समुदायों से जुड़े भारतीयों ने योगदान दिया। इस तरह PNB भारतीयों की आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वदेशी विचार का प्रतीक बनकर उभरा।
रावलपिंडी में खुली पहली शाखा
लाहौर में कारोबार शुरू करने के बाद बैंक ने अपना विस्तार किया। वर्ष 1900 में लाहौर के बाहर पहली शाखा रावलपिंडी में खोली गई। इसके बाद कराची और पेशावर जैसे शहरों में भी बैंक की शाखाएं स्थापित हुईं। धीरे-धीरे बैंक का कारोबार बढ़ता गया और उसकी पहचान एक प्रमुख भारतीय बैंक के रूप में बनने लगी।
देश के बंटवारे के बाद दिल्ली आया मुख्यालय
साल 1947 में भारत के विभाजन के दौरान लाहौर पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। ऐसे में पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों ने अपना पंजीकृत कार्यालय लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। 31 मार्च 1947 को इस संबंध में कदम उठाए गए और 20 जून 1947 को लाहौर हाई कोर्ट से स्थानांतरण की अनुमति मिली। इसके बाद दिल्ली बैंक का प्रमुख केंद्र बना।
क्या SBI से भी पुराना है PNB?
भारतीय बैंकिंग इतिहास में पंजाब नेशनल बैंक को भारत का पहला स्वदेशी बैंक कहा जाता है। हालांकि, भारत में भारतीय स्वामित्व वाले बैंक इससे पहले भी स्थापित हो चुके थे। भारतीय रिजर्व बैंक के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, इलाहाबाद बैंक की स्थापना 1865 में हुई थी, जबकि PNB ने 1895 में काम शुरू किया। इसलिए “पहला स्वदेशी बैंक” और “भारत का सबसे पुराना बैंक” दो अलग-अलग दावे हैं।
आज पंजाब नेशनल बैंक देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शामिल है। लाहौर से शुरू होकर दिल्ली तक पहुंचा इसका सफर भारत के बैंकिंग इतिहास और विभाजन के दौर में हुए बड़े बदलावों की कहानी भी बताता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

