‘क्या आपको सिस्टम या नतीजों पर शक है?’ 124 पूर्व नौकरशाहों ने चुनाव आयोग के समर्थन में लिखा खुला पत्र

1795 Shares

 देश के 124 पूर्व IAS-IFS अधिकारियों के एक ग्रुप ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का बचाव करते हुए एक खुला पत्र जारी किया है। उनका तर्क है कि चुनावी धोखाधड़ी के आरोपों के लिए ठोस सबूत होने चाहिए।

इस ग्रुप ने चेतावनी दी कि बिना सबूत के वोट धांधली के दावे लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के भरोसे को कमजोर करते हैं।

विपक्ष कर रहा चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन

भारत के नागरिकों को लिखा गया यह पत्र ऐसे समय में आया है जब विपक्षी नेता वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोप लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस विवाद के कारण दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। शनिवार को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रहे कई विरक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।

पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि उन्होंने अपना करियर चुनाव कराने और उनका अध्ययन करने में बिताया है, जिसमें वोटर लिस्ट तैयार करना और उन स्ट्रॉन्ग रूम को सुरक्षित रखना शामिल है, जहां EVM रखी जाती हैं।

पत्र में लिखा गया है कि हम किसी पार्टी से नहीं जुड़े हैं। हम इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि अब बिना किसी सबूत के हमारे चुनावों के लिए धांधली जैसे शब्द का इस्तेमाल किया जाता है और इसे बार-बार दोहराने से उस लोकतांत्रिक भरोसे को चोट पहुंचती है जो हम सभी का है।

हम जानते हैं कि धांधली वाला चुनाव कैसा होता है- पूर्व नौकरशाह

पत्र में आगे लिखा है कि हम जानते हैं कि धांधली वाला चुनाव कैसा होता है। हमने उन दिनों में काम किया है जिनके बारे में आप सिर्फ फिल्मों से जानते हैं। बूथ पर कट्टा, बाहुबली के आदमी, बैलेट बॉक्स भरना या चोरी करना, वोटरों को लौटा देना। बूथ कैप्चरिंग इतनी आम बात थी कि संसद ने 1989 में इसे अपराध घोषित कर दिया। जब हिंसा बोलती है तो लोकतंत्र चुप हो जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *