अमानगढ़ की ‘चार नंबरी’ बाघिन का कॉर्बेट तक दबदबा, जंगल में अपनी अलग पहचान
उत्तर प्रदेश के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की चर्चित बाघिन ‘चार नंबरी’ इन दिनों अपने दबदबे को लेकर चर्चा में है। अपनी ताकत और इलाके में सक्रियता के लिए पहचानी जाने वाली इस बाघिन की मौजूदगी कॉर्बेट के जंगलों तक सुर्खियां बटोर रही है। उसकी दहाड़ और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर वन्यजीव प्रेमियों के बीच खास दिलचस्पी बनी हुई है।
अमानगढ़ का जंगल बाघों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास माना जाता है। यह क्षेत्र उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के आसपास के वन्यजीव परिदृश्य से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां बाघों की आवाजाही और उनके क्षेत्रीय व्यवहार पर वन विभाग की नजर रहती है।
बाघिनों के बीच अपने क्षेत्र को लेकर प्रतिस्पर्धा होना जंगल के प्राकृतिक जीवन का हिस्सा है। बाघ अपने इलाके की पहचान गंध, आवाज और अन्य संकेतों के जरिए भी दर्ज कराते हैं। इसी वजह से किसी प्रभावशाली बाघिन की मौजूदगी दूसरे बाघों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
‘चार नंबरी’ बाघिन को लेकर सामने आ रही चर्चाओं ने अमानगढ़ के वन्यजीव संसार की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। हालांकि, दूसरी बाघिनों के उसके सामने झुकने या उसकी दहाड़ सुनकर पीछे हटने जैसे दावों की पुष्टि के लिए वन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड और विशेषज्ञों की जानकारी जरूरी है।
अमानगढ़ और कॉर्बेट के आसपास का वन क्षेत्र बाघ संरक्षण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां बाघों की गतिविधियों पर नजर रखना, उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना संरक्षण के प्रमुख उद्देश्य हैं।
फिलहाल, अमानगढ़ की ‘चार नंबरी’ बाघिन अपनी चर्चित पहचान के कारण लोगों की उत्सुकता का केंद्र बनी हुई है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

