हरियाणा में कपास की खेती का केंद्र बना सिरसा, 3.61 लाख एकड़ में बुवाई; उत्पादन 2 लाख मीट्रिक टन के पार

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सिरसा: हरियाणा में कपास की खेती के मामले में सिरसा जिला प्रदेश में सबसे आगे है। खरीफ सीजन 2025-26 की अस्थायी रिपोर्ट के अनुसार, सिरसा में 3,61,336 एकड़ क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई है। जिले का अनुमानित कपास उत्पादन 2,00,567.98 मीट्रिक टन रहा है। क्षेत्रफल और कुल उत्पादन, दोनों मामलों में सिरसा प्रदेश में पहले स्थान पर है।

हरियाणा में इस सीजन कपास का कुल रकबा 9,71,970 एकड़ दर्ज किया गया है, जबकि अनुमानित उत्पादन 4,96,418.70 मीट्रिक टन है। इस लिहाज से प्रदेश के कपास उत्पादन में सिरसा की हिस्सेदारी भी काफी महत्वपूर्ण है।

हिसार और भिवानी भी प्रमुख कपास उत्पादक जिले

रिपोर्ट के मुताबिक कपास के रकबे के मामले में सिरसा के बाद हिसार और भिवानी का स्थान है। हिसार में 2,09,827 एकड़ और भिवानी में 1,11,891 एकड़ में कपास की खेती दर्ज की गई। इसके बाद फतेहाबाद में 90,624 एकड़ और चरखी दादरी में 39,520 एकड़ क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई।

हालांकि प्रति एकड़ औसत उपज के मामले में सिरसा सबसे आगे नहीं है। इस श्रेणी में नूंह (मेवात) 694.49 किलोग्राम प्रति एकड़ की औसत उपज के साथ प्रदेश में शीर्ष पर रहा। हरियाणा की औसत उपज 510.73 किलोग्राम प्रति एकड़ दर्ज की गई।

सिरसा में कपास अनुसंधान को भी मिल रहा बढ़ावा

सिरसा में कपास की खेती के साथ अनुसंधान और तकनीकी विकास का भी लंबा इतिहास रहा है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का कपास अनुसंधान केंद्र सिरसा में स्थित है। विश्वविद्यालय के अनुसार, इस केंद्र ने कपास की किस्मों, बीज उत्पादन, खेती के मशीनीकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़े कार्यों में योगदान दिया है।

हरियाणा सरकार भी कपास की उत्पादकता बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने पर जोर दे रही है। अक्टूबर 2026 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा था कि बदलते मौसम और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए कम पानी में अधिक उत्पादन वाली तकनीकों को बढ़ावा देना जरूरी है। सरकार ने कपास किसानों के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों और एकीकृत कीट प्रबंधन के इस्तेमाल पर वित्तीय सहायता की योजना भी शुरू की है।

‘सफेद सोना’ के रूप में पहचान

हरियाणा सरकार कपास को राज्य की महत्वपूर्ण नकदी फसलों में शामिल करती है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में किसान कपास की खेती से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने भी कपास को ‘सफेद सोना’ बताते हुए इसकी उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया है।

इस तरह खरीफ सीजन 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि कपास के रकबे और कुल उत्पादन में सिरसा हरियाणा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अब किसानों और कृषि विभाग की चुनौती बदलते मौसम, कीट प्रकोप और उत्पादन लागत के बीच कपास की उत्पादकता को बनाए रखना है।

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