रोहतक रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर हाई कोर्ट सख्त, न्यायिक अधिकारियों को जमानत याचिकाओं पर सुनवाई से रोका

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रोहतक: रियल एस्टेट धोखाधड़ी के एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने रोहतक सत्र मंडल में तैनात न्यायिक अधिकारियों को इस मामले से जुड़ी किसी भी जमानत याचिका पर सुनवाई करने से रोक दिया है। मामला डीएचएल इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और गुप्ता प्रॉपर्टी डेवलपर्स से जुड़े आवासीय प्रोजेक्ट का है, जिसमें करीब 30 खरीदारों से लगभग 11.69 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप है।

मामला रोहतक के सेक्टर-27ए स्थित ‘डीएचएल न्यू टाउन’ प्रोजेक्ट से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि खरीदारों को परियोजना की मंजूरी, समय पर मकान का कब्जा और बिक्री विलेख कराने का भरोसा दिलाकर उनसे रकम ली गई। आरोप है कि पैसे लेने के बावजूद कई खरीदारों को न तो मकान का कब्जा मिला और न ही बिक्री विलेख कराया गया।

जमानत को लेकर अदालत ने जताई चिंता

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के सामने यह बात आई कि कुछ आरोपितों को ट्रायल कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जबकि अन्य आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर अलग रुख अपनाया गया। इसके बाद जस्टिस एनएस शेखावत की पीठ ने रोहतक सत्र मंडल में तैनात न्यायिक अधिकारियों को इस मामले से संबंधित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करने से रोक दिया। यह आदेश 30 सितंबर को पारित किया गया था।

अदालत ने जांच की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले के जांच अधिकारी का रवैया ऐसा प्रतीत होता है, जैसे वह आरोपितों की मदद करने का प्रयास कर रहा हो। अदालत ने यह भी कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद जांच अपेक्षित तरीके से आगे नहीं बढ़ी।

पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल

हाई कोर्ट ने रोहतक में तैनात पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अदालत के मुताबिक एफआईआर दर्ज होने के करीब चार महीने बाद भी रियल एस्टेट प्रमोटरों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई थी। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आम लोगों की जीवनभर की कमाई दांव पर लग सकती है और इसे महज सामान्य अनुबंध विवाद के रूप में नहीं देखा जा सकता।

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करेगा जांच

हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि मामले की जांच के लिए एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नियुक्त किया जाए। नियुक्त अधिकारी को जांच की प्रगति की स्थिति रिपोर्ट अगली सुनवाई से पहले अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।

मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब जांच की दिशा और आरोपितों से जुड़े मामलों में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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