सरयू तट पर राजा दशरथ ने क्यों कराया था यज्ञ? रामायण में मिलता है इसकी वजह का उल्लेख
अयोध्या। भगवान श्रीराम के जन्म से जुड़ी रामायण की कथा में राजा दशरथ के यज्ञ का विशेष महत्व बताया गया है। अयोध्या में सरयू नदी के तट से जुड़ी इस कथा के पीछे संतान प्राप्ति की इच्छा को प्रमुख कारण माना जाता है।
रामायण के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति की इच्छा से उन्होंने ऋषियों की सलाह पर यज्ञ कराने का निर्णय लिया। इस यज्ञ का उद्देश्य संतान की प्राप्ति के लिए देवताओं की कृपा प्राप्त करना बताया गया है।
कथा के अनुसार, यज्ञ संपन्न होने के बाद राजा दशरथ को दिव्य प्रसाद प्राप्त हुआ। इसे उनकी तीनों रानियों—कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा—को दिया गया। इसके बाद चार पुत्रों के रूप में श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।
रामायण की कथा में राजा दशरथ के इस यज्ञ को भगवान श्रीराम के अवतार और अयोध्या के आगे के इतिहास से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि सरयू तट और अयोध्या से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में इस प्रसंग का विशेष महत्व माना जाता है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

