बिहार के गया जी में पितृपक्ष के दौरान आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। रूस, यूक्रेन और जर्मनी से 22 विदेशी श्रद्धालु गया पहुंचे और फल्गु नदी के तट पर अपने पितरों के लिए पिंडदान किया। विदेशी नागरिकों के इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने से यहां मौजूद लोगों का ध्यान भी उनकी ओर आकर्षित हुआ।
गया को पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
विदेशों से गया पहुंचे श्रद्धालु
रूस, यूक्रेन और जर्मनी से आए 22 विदेशी नागरिकों ने गया जी में पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया। उन्होंने फल्गु नदी के तट पर विधि-विधान के साथ अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान किया।
फल्गु तट पर किया पिंडदान
गया में फल्गु नदी का धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है। यहां पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं। विदेशी श्रद्धालुओं ने भी स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार अनुष्ठान में भाग लिया।
गया की धार्मिक परंपरा ने खींचा विदेशियों का ध्यान
गया जी में पिंडदान की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। यहां आने वाले श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए धार्मिक कर्मकांड करते हैं। रूस, यूक्रेन और जर्मनी से पहुंचे 22 विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने गया की धार्मिक परंपरा की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को भी सामने रखा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

