गन्ने में मिठास कम होने की वजह क्या है? यूपी में लगातार बारिश का असर
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश का असर अब गन्ने की फसल पर भी दिखाई देने लगा है। बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने से फिलहाल गन्ने में चीनी की मात्रा कम बनी हुई है। इसका सीधा असर गन्ने की मिठास और उससे चीनी की रिकवरी पर पड़ सकता है।
आखिर गन्ने में मिठास कैसे बनती है?
गन्ने के पौधे में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान शर्करा का निर्माण होता है। पौधा सूर्य की रोशनी, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से भोजन तैयार करता है। यही शर्करा धीरे-धीरे गन्ने के तने में जमा होती जाती है और गन्ने में मिठास बढ़ती है।
गन्ने की मिठास और उसमें मौजूद चीनी की मात्रा पर मौसम का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। सामान्य तौर पर गन्ने की परिपक्वता के दौरान धूप और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम शर्करा के संचय के लिए अनुकूल माना जाता है।
लगातार बारिश से क्यों घट सकती है चीनी की मात्रा?
यूपी के कई हिस्सों में लगातार बारिश होने से खेतों में नमी का स्तर अधिक है। ऐसे मौसम में गन्ने के पौधे की परिपक्वता और उसमें शर्करा के संचय की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। फिलहाल इसी वजह से कई क्षेत्रों में गन्ने में चीनी की मात्रा अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है।
हालांकि, मौसम में बदलाव और गन्ने की फसल के आगे बढ़ने के साथ स्थिति में सुधार की संभावना रहती है। गन्ने की वास्तविक मिठास और चीनी रिकवरी का आकलन फसल की परिपक्वता तथा मिलों में होने वाली जांच के आधार पर किया जाता है।
किसानों और चीनी मिलों के लिए क्यों अहम है यह स्थिति?
गन्ने में चीनी की मात्रा चीनी मिलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे चीनी की रिकवरी प्रभावित होती है। बारिश का असर यदि लंबे समय तक बना रहता है तो गन्ने की गुणवत्ता और चीनी उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
इसलिए आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और गन्ने में शर्करा की मात्रा पर किसानों तथा चीनी उद्योग की नजर बनी रहेगी।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

