सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की निगाही परियोजना इन दिनों कथित अवैध वसूली और कोयले के खेल को लेकर चर्चा के केंद्र में है। नवानगर थाना क्षेत्र स्थित निगाही परियोजना में चर्चा है कि परियोजना के एक महत्वपूर्ण विभाग में पदस्थ मीणा नामक अधिकारी द्वारा कोयला परिवहन से जुड़े ट्रांसपोर्टरों से कथित तौर पर 5 रुपए प्रति टन की एंट्री करवाई जा रही है।
चर्चा यह भी है कि खदान से कोयले की गाड़ियों में लोडिंग से लेकर एंट्री और वेट ब्रिज कांटे से बाहर निकलने तक कथित वसूली का सिलसिला चलता है। सवाल यह है कि यदि परियोजना में इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से चर्चा में हैं, तो परियोजना अधिकारी, खदान प्रबंधक और महाप्रबंधक स्तर तक इसकी भनक क्यों नहीं पहुंची? या फिर जानकारी होने के बावजूद इस पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

5000 से 7000 टन रोजाना रोड ट्रांसपोर्ट, तो कथित वसूली कितनी?
सूत्रों के अनुसार निगाही परियोजना से प्रतिदिन रोड ट्रांसपोर्ट के माध्यम से लगभग 5000 से 7000 टन कोयले का परिवहन होने की चर्चा है। कभी-कभी यह आंकड़ा 10 हजार टन प्रतिदिन से भी अधिक पहुंचने की बात सामने आती है। ऐसे में यदि 5 रुपए प्रति टन की कथित वसूली की चर्चा सही है, तो प्रतिदिन होने वाली रकम का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। हालांकि, इस कथित वसूली की वास्तविकता क्या है, इसकी निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
सिर्फ 5 रुपए प्रति टन नहीं, ‘स्टीम कोयले’ के खेल की भी चर्चा!
मामला यहीं खत्म होता नजर नहीं आता। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि परियोजना से बॉडी गाड़ियों में लोड होने वाले कोयले में भी कथित हेरफेर किया जा रहा है। आरोप है कि सामान्य कोयले की जगह कथित तौर पर स्टीम कोयला तक लोड करवाया जा रहा है। यदि ऐसा हो रहा है तो इससे NCL को प्रतिदिन लाखों रुपये के नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी के साथ चर्चा यह भी है कि इस कथित खेल के एवज में 15 से 30 रुपए प्रति टन तक की अतिरिक्त वसूली कराए जाने की बात सामने आ रही है।

फिर सवालों के घेरे में NCL का विजिलेंस विभाग
सबसे बड़ा सवाल अब NCL के विजिलेंस विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। कंपनी के विजिलेंस विभाग की जिम्मेदारी ही परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन जैसी गतिविधियों पर नजर रखना और शिकायतों की जांच करना है। इसके बावजूद यदि निगाही परियोजना में कथित तौर पर इतने बड़े स्तर पर अवैध वसूली और कोयले में हेरफेर की चर्चा चल रही है, तो विजिलेंस विभाग तक इसकी जानकारी क्यों नहीं पहुंची?
‘मीणा साहब’ की कथित एंट्री पर जांच हुई तो खुल सकता है बड़ा राज!
परियोजना में पदस्थ मीणा नामक अधिकारी को लेकर चल रही चर्चाओं की यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि आखिर 5 रुपए प्रति टन की कथित एंट्री किसके इशारे पर और किसके माध्यम से हो रही है। साथ ही बॉडी गाड़ियों में सामान्य कोयले के स्थान पर कथित रूप से स्टीम कोयला लोड किए जाने की बात भी जांच का महत्वपूर्ण बिंदु हो सकती है। परिवहन के रिकॉर्ड, वेट ब्रिज की एंट्री, डिस्पैच रिकॉर्ड, कोयले के ग्रेड और संबंधित ट्रांसपोर्टरों के बयानों का मिलान किया जाए तो कथित खेल की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
खबर के बाद जागेगा विजिलेंस या फिर जारी रहेगी ‘कुंभकरणी नींद’?
निगाही परियोजना को लेकर उठ रही इन गंभीर चर्चाओं के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खबर सार्वजनिक होने के बाद NCL का विजिलेंस विभाग नींद से जागेगा? क्या कथित 5 रुपए प्रति टन एंट्री, 15 से 30 रुपए प्रति टन की कथित अतिरिक्त वसूली और कोयले के ग्रेड में कथित हेरफेर की निष्पक्ष जांच होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों और जांच के आश्वासन के बीच दबकर रह जाएगा? फिलहाल निगाहें NCL प्रबंधन और विजिलेंस विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

