रिटायर्ड कॉन्स्टेबल बाबा बाबूराम और उनका नाती बुधवार तड़के 4:30 बजे घर से बाहर आ गए । इंस्पेक्टर जगदीश चंद्र द्वारा समझाए जाने के बाद पुलिस घर में दाखिल हो सकी। इससे पहले पुलिस जैसे ही घर में अंदर घुसने का प्रयास करती थी वैसे ही बाबूराम बंदूक दिखाकर धमकाते रहे। 22 घंटे बाद यह संकट समाप्त हो गया बच्चों का कहना है कि उसे बाबा से कोई शिकायत नहीं है।
बाबा ने खुद खोला दरवाजा, 22 घंटे बाद नाती को लेकर बाहर आए
मंगलवार सुबह सात बजे बाबा ने नाती को अपने साथ घर में बंद कर लिया था। बुधवार तड़के बाबा ने खुद ही दरवाजा खोला। पुलिस बाबा और नाती को थाने ले गई है। बच्चे के पिता को भी बुलाया गया है। बाबा ने पुलिस को बयान दिया है कि बच्चे का पिता अविनाश साढे़ चार साल बाद उससे मिलने आया है। वह उसे सिर्फ इसलिए ले जाना चाहता है क्योंकि बच्चे के नाम संपत्ति है।
बाबा की बच्चे की परवरिश कर रहे हैं
दरअसल बाबा ही बच्चे की परवरिश कर रहे हैं। बच्चे को जन्म देने के बाद उसकी मां का निधन हो गया था और पिता ने दूसरी शादी कर ली। बाबा का कहना है की सौतेली मां बच्चों के साथ मारपीट करती थी इसलिए उन्होंने स्वयं परवरिश करने की ठानी। बाबूराम की पत्नी का भी निधन हो चुका है और एक हादसे में बड़े बेटे की मौत भी हो चुकी है।
बुधवार तड़के 4:30 बजे इंस्पेक्टर के समझाने पर माने बाबा
उधर मोहल्ले वासी रात को चैन से नहीं सो सके। तमाम लोग अपनी छतों पर बैठे रहे उन्हें लग रहा था कि बाबा कहीं कुछ गलत ना कर बैठें। पुलिस भी मकान की घेराबंदी किए रही। बच्चा कक्षा आठ में पढ़ रहा है। वह फर्रुखाबाद के एक हॉस्टल में रहता है। एक महीने पहले बाबा उसे हॉस्टल से घर ले आए थे। उन्हें लग रहा था कि उनका बेटा अविनाश बच्चे को कहीं अपने साथ ना ले जाए। बाबा ने मकान अन्य संपत्ति अपने बेटे के नाम कर दी है।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

