Jharkhand News महाजनी प्रथा एवं सामंतवादी व्यवस्था से त्रस्त होकर वर्ष 1994 में मिसिर बेसरा ने भाकपा माओवादी संगठन का हाथ थामा और संगठन के लिए प्रचार-प्रसार करने लगा। इससे पहले उसने धनबाद के पीके राय मेमोरियल कॉलेज से पीजी की पढ़ाई पूरी की थी।
पढ़ाई के दौरान ही वह क्रांतिकारी छात्र मोर्चा से जुड़ गया था। इसके बाद उसे संगठन में बड़े-बड़े ओहदे मिलते गए। इस दौरान उसने अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार किया और बिहार, झारखंड व छत्तीसगढ़ में सैकड़ों नक्सली वारदातों को अंजाम दिया।
राइफल, एसएलआर और एके-47 लूटने से लेकर पुलिस जवानों व अधिकारियों की हत्या और आईईडी विस्फोट करने जैसी घटनाओं में उसके संगठन के सदस्य शामिल रहे। इन घटनाओं में मिसिर बेसरा की भी संलिप्तता रही है।
इसका खुलासा कुख्यात नक्सली ईर टांग निवासी मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल एवं बरवाअड्डा निवासी मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ टुम्बा मुर्मू ने इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार के समक्ष दिए अपने स्वीकारोक्ति बयान में किया है।
44 दिन का लिया था रिमांड
माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और झारखंड व ओडिशा में 2.20 करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा सहित उसके दो सहयोगियों मोछू उर्फ विभीषण एवं बीरेन हांसदा को 30 जुलाई 2026 को डीएसपी मुख्यालय विनोद कुमार ने आवेदन देकर अदालत से पुलिस हिरासत में लिया था।
पुलिस ने 44 दिन (1,056 घंटे) की रिमांड मांगी थी। हालांकि, रिमांड अवधि पूरी होने से पहले ही पुलिस ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को तीनों को अदालत में पेश कर दिया। अदालत के आदेश पर तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
खुफिया एजेंसी की सूचना पर पकड़े गए थे पांच नक्सली
28 जुलाई 2026 को बरवाअड्डा थाना क्षेत्र की तिलैया पंचायत स्थित बेहचिया गांव के श्मशान घाट के आगे महिंद्रा मिनी वैन/स्कॉर्पियो संख्या जेएच-10-बीएच-1056 पर सवार पांच नक्सलियों को पुलिस ने तीन एके-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 गोलियों के साथ पकड़ा था।
बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के लिखित आवेदन पर 29 जुलाई 2026 को बरवाअड्डा थाने में मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल, माओवादी संगठन के रीजनल कमांडर मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण, एरिया कमांडर गौरव उर्फ वीरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ, मंगल मुर्मू एवं दिनेश राय के विरुद्ध यूएपीए, सीएलए, आर्म्स एक्ट व बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
29 जुलाई की रात ही सभी को जेल भेज दिया गया था। 30 जुलाई 2026 को मिसिर बेसरा, मोछू एवं बीरेन हांसदा उर्फ गौरव हांसदा को रिमांड पर लेकर पुलिस रांची गई थी। रांची में राज्य और केंद्र सरकार की कई सुरक्षा एजेंसियों ने उनसे पूछताछ की। पूछताछ में मिसिर, मोछू और गौरव ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा के खिलाफ 175 मामले दर्ज हैं, जबकि मोछू पर 137 मामले दर्ज हैं। वहीं, बीरेन हांसदा के विरुद्ध आठ मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने सभी मामलों को लेकर आरोपियों से पूछताछ की। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने कई मामलों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है।
40 वर्षों से संभाल रखी थी माओवादियों की कमान
पीरटांड़ निवासी मिसिर बेसरा करीब 40 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय था। धनबाद में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान महाजनी आंदोलन के जरिए वह नक्सली संगठन से जुड़ा था।
मिसिर बेसरा को पहली बार सितंबर 2007 में खूंटी से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वर्ष 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट पर हमला कर माओवादियों ने उसे छुड़ा लिया था। इसके बाद से वह बूढ़ा पहाड़, कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय रहा।
देशभर में मिसिर बेसरा भाकपा माओवादी का एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य बचा था। 22 फरवरी 2026 को पोलित ब्यूरो सदस्य और भाकपा माओवादी के प्रमुख देव ने सरेंडर कर दिया था। इससे पहले नंबला केशव राजू उर्फ बसवराजू को सुरक्षा बलों ने 21 मई 2025 को मुठभेड़ में मार गिराया था।
माओवादियों का सचिव रहा गणपति पिछले आठ वर्षों से ट्रेसलेस है। खराब स्वास्थ्य के कारण कई बार उसकी मौत की अटकलें भी लगती रही हैं।
175 केस दर्ज हैं बेसरा के खिलाफ
झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में मिसिर बेसरा के खिलाफ 175 मामले दर्ज हैं। दो मामलों में एनआईए को भी उसकी तलाश थी। झारखंड में बेसरा पर एक करोड़ रुपये, जबकि ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है।
मिसिर बेसरा की टीम की प्रमुख नक्सली वारदातें
- अड़की, रांची: हेमरम बाजार में पुलिस पर हमला कर चार राइफल व गोलियां लूटीं।
- 2001, हजारीबाग: उरिया जंगल में सीआरपीएफ जवानों पर हमला, 12 जवानों की हत्या।
- 2001, तोपचांची: ब्लॉक परिसर में पुलिस पर हमला, 13 पुलिसकर्मी व कमांडर मारे गए।
- मोहनपुर: बीटल सोए में पुलिस पर हमला कर 26 राइफल लूटीं।
- अप्रैल 2003, बोकारो: चंद्रपुरा रेल थाना पर हमला कर 23 राइफल व दो स्टेनगन लूटीं।
- 2004, पश्चिमी सिंहभूम: जामदा ओपी पर हमला कर हथियार लूटे।
- जून 2004, पश्चिमी सिंहभूम: बलिवा में पुलिस पर हमला कर 11 एसएलआर व तीन इंसास राइफल लूटीं।
- 2004, रांची: रनिया थाना पर हमला कर तीन एसएलआर व एक कार्बाइन लूटी।
- जून 2005, उत्तर बिहार: मधुबन में बैंक पर हमला कर लूट की वारदात।
- 2005, बोकारो: झुमरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमला।
- 2005, गिरिडीह: होमगार्ड शस्त्रागार पर हमला कर करीब 100 राइफल लूटीं।
- 2005, जहानाबाद: जेल ब्रेक की घटना को अंजाम दिया।
- 2005, लखीसराय: खैरा पिकेट पर हमला।
- 2005, डुमरा: सीआरपीएफ कैंप पर हमला।
- 2005, बोकारो: सीआईएसएफ कैंप पर हमला।
- 26 मई: जराईकेला-किंबुईर जंगल में पुलिस से मुठभेड़, कोबरा जवान विक्रम जाधव को गोली लगी।
- 25 मई: सरायकेला के सीमावर्ती भलीवां में सीआईएसएफ जवानों पर हमला, रेडियो सेट लूटे।
- 18 मार्च 2025: जराईकेला-दिलीपोस जंगल में आईटीबीपी कैंप पर हमला, सीआरपीएफ बटालियन कमांडेंट समेत कई जवान घायल।
- 22 मार्च 2025: छोटानागरा के मारांगपोंगा जंगल में सीआरपीएफ बटालियन पर हमला, जवान सुनील कुमार मंडल की मौत।
- 12 अप्रैल 2025: छोटानागरा-जराईकेला क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर फायरिंग और आईईडी विस्फोट।
- 18 अप्रैल 2025: सारंडा में आईईडी विस्फोट।
- 12 मई 2025: छोटानागरा-जराईकेला थाना क्षेत्र में आईईडी विस्फोट।
- 30 मई 2025: जराईकेला के बनग्राम में आईईडी विस्फोट।
- 31 मई 2025: आईईडी विस्फोट कर चाईबासा में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया।
- 8 अगस्त 2025: आईटीबीपी और कोबरा बटालियन के जवानों पर हमला।
- 10 अक्टूबर 2025: जराईकेला थाना क्षेत्र में आईईडी विस्फोट कर सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाया।
- छोटानागरा: आईईडी विस्फोट कर 245 मैगजीन लूटने की वारदात को अंजाम दिया।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

