हाइपरसोनिक हथियारों की रेस में अमेरिका की बड़ी छलांग, HATS लॉन्चर से मिसाइल का सफल टेस्ट

1945 Shares

 अमेरिकी आर्मी ने हेवी आर्टिलरी टेस्ट सिस्टम (HATS) का इस्तेमाल कर अपना पहला लाइव-फायर हाइपरसोनिक टेस्ट किया है। यह लॉन्चर असल में स्ट्रैटेजिक लॉन्ग रेंज कैनन (SLRC) प्रोग्राम के लिए बना था, जिसे 2022 में फंडिंग बंद होने के बाद बंद कर दिया गया था।

30 जुलाई को हुआ टेस्ट

यूएस आर्मी ने यह ट्रायल 30 जुलाई को एरिजोना के युमा प्रोविंग ग्राउंड (YPG) में किया। YPG आर्मी की सबसे बड़ी टेस्टिंग फैसिलिटी है और 8.3 लाख एकड़ में फैली है। इस टेस्ट में DEVCOM आर्मामेंट्स सेंटर, लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी (LLNL) और YPG शामिल थे।

कैसे हुआ टेस्ट

पूरी हाइपरसोनिक मिसाइल की बजाय टीम ने HATS से एक इंटीग्रेटेड लॉन्च पैकेज फायर किया। इस हार्ड पैकेज के अंदर एक्सपेरिमेंटल पेलोड था। इसका मकसद इम्पैक्ट पर परफॉर्मेंस जांचने का तेज और कम लागत वाला तरीका था।

इस्तेमाल की गई तोप SLRC से ली गई थी। इसे 1 हजार मील से ज्यादा दूर के टारगेट पर रॉकेट-असिस्टेड, प्रिसिजन-गाइडेड प्रोजेक्टाइल दागने के लिए बनाया गया था। यह रेंज पारंपरिक 155 MM आर्टिलरी से कहीं ज्यादा है।

प्रोग्राम कैंसिल होने के बाद आर्मी ने इस लॉन्चर को हाइपरसोनिक रिसर्च प्लेटफॉर्म के रूप में दोबारा इस्तेमाल किया। लेटेस्ट टेस्ट में तोप ने पूरी मिसाइल नहीं, बल्कि प्रोटेक्टिव ILP में बंद वॉरहेड ही फायर किया।

डेटा से मिलेगा फायदा

इंजीनियरों ने लॉन्च से लेकर इम्पैक्ट तक टेलीमेट्री, हाई-स्पीड कैमरे और रेंज इंस्ट्रूमेंट से पैकेज को ट्रैक किया। इससे हथियार के आखिरी स्टेज की परफॉर्मेंस का पता चला। यह मजबूत ILP का पहला लाइव-फायर भी था। इससे साबित हुआ कि तोप लॉन्च की भारी ताकत झेल सकती है।

आर्मी के मुताबिक, यह डेटा भविष्य में हाइपरसोनिक हथियारों के विकास में मदद करेगा और महंगे फुल-स्केल मिसाइल टेस्ट की जरूरत घटाएगा।

एक पूरे हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट का खर्च 9.5 मिलियन से 15 मिलियन डॉलर तक हो सकता है। तोप वाला तरीका पारंपरिक टेस्ट की जगह नहीं लेगा, लेकिन विंड टनल, लैब और रॉकेट स्लेड टेस्ट को सपोर्ट करके कुल लागत कम करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *