‘सबसे पहले आतंकी ढांचा खत्म करे पाकिस्तान’, सिंधु जल समझौते को लेकर भारत के अमेरिकी राजदूत ने लगाई फटकार

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अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले पांच दशकों में सिंधु जल संधि की नींव को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद ने उस सद्भावना और दोस्ती को खत्म कर दिया है जिस पर 1960 का समझौता आधारित था और संधि को स्थगित रखने का नई दिल्ली का फैसला बस उसी सच्चाई को मानता है।

अमेरिका की न्यूजवीक मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, क्वात्रा ने कहा कि संधि की प्रस्तावना सद्भावना और दोस्ती की भावना के साथ की गई प्रतिबद्धता को दर्शाती है लेकिन पाकिस्तान के व्यवहार ने आधी सदी में उस नींव को कमजोर कर दिया है।

सद्भावना और दोस्ती की भावना पर थी संधि’

क्वात्रा ने कहा, “यह याद रखना जरूरी है कि संधि की प्रस्तावना में कहा गया है कि यह सद्भावना और दोस्ती की भावना के साथ की गई थी। पाकिस्तान ने उस सद्भावना और दोस्ती को खत्म करने में आधी सदी बिता दी। स्थगन बस उसी बात को मानता है जिसे पाकिस्तान के व्यवहार ने पहले ही नष्ट कर दिया था।”

उनके ये बयान तब आया है जब पाकिस्तान ने हाल ही में एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। इस कॉन्फ्रेंस में भारत के उस फैसले का विरोध किया गया था जिसके तहत पिछले साल 23 अप्रैल को सिंधु जल संधि (IWT) को रोक दिया गया था। यह फैसला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान में ट्रेंड आतंकवादियों द्वारा 26 लोगों की हत्या किए जाने के एक दिन बाद लिया गया था।

इस संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज का कंट्रोल दिया गया था, जिनसे बेसिन का लगभग 20 प्रतिशत पानी मिलता है। वहीं, पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब पर अधिकार मिला, जिनसे लगभग 80 प्रतिशत पानी मिलता है।

‘पाकिस्तान का युद्ध, दुश्मनी और आतंकवाद वाला रवैया रहा है’

न्यूज़वीक के अनुसार, क्वात्रा ने कहा, “इस असमानता ने दशकों तक उन भारतीय इलाकों में विकास को रोका, जिन्हें बेहतर जल अधिकारों से फायदा हो सकता था। फिर भी भारत ने संधि का सम्मान किया।”

राजदूत ने कहा कि भारत के प्रति पाकिस्तान का रवैया हमेशा युद्ध, दुश्मनी और सीमा पार आतंकवाद वाला रहा है। उन्होंने 1965, 1971 और 1999 के संघर्षों के साथ-साथ बड़े आतंकी हमलों का जिक्र किया, जिनमें 2001 में संसद पर हमला, 2008 में मुंबई हमले, 2016 में उरी और पठानकोट हमले, 2019 में पुलवामा हमला और 2025 में पहलगाम हमला शामिल हैं।

‘पाकिस्तान को पहले खत्म खत्म करना होगा आतंकी ढांचा’

क्वात्रा ने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान सच में द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत का सहयोग चाहता है तो उसे सबसे पहले उस आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा जिसे उसने इतने सालों में खड़ा किया है। संधि को लागू करने के मामले में क्वात्रा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने बार-बार भारत के प्रोजेक्ट्स में देरी की है और बदलती टेक्नोलॉजी और जरूरतों को देखते हुए समझौते पर दोबारा विचार करने की कोशिशों का विरोध किया है।

क्वात्रा ने आगे कहा, “पाकिस्तान ने छह दशकों में हुए तकनीकी बदलावों को देखते हुए संधि पर दोबारा बातचीत करने की भारत की कोशिशों को भी लगातार रोका है, जिससे भारत अपनी पनबिजली क्षमता का विकास कर सकता था।”

उन्होंने कहा, “धीरे-धीरे पाकिस्तान ने भारत का यह भरोसा खत्म कर दिया कि वह संधि के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकता है या आज की हकीकत के हिसाब से किसी बेहतर समझौते की उम्मीद कर सकता है।”

‘भारत का रुख साफ है’

भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत फिर से शुरू करने की मांगों पर जवाब देते हुए क्वात्रा ने कहा कि पिछली कोशिशें मुख्य चिंताओं को दूर करने में नाकाम रही हैं।

क्वात्रा ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का रुख साफ कर दिया है, ‘आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते। पानी और खून साथ-साथ नहीं बह सकते’।” क्वात्रा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को अपनी चुनौतियों के लिए भारत को दोष देने के बजाय अपने जल प्रबंधन को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “भारत पर आरोप लगाने और धमकियां देने के लिए कॉन्फ्रेंस आयोजित करने के बजाय पाकिस्तान सरकार के लिए अपनी खराब जल उत्पादकता को सुधारना बेहतर होगा।” उन्होंने आगे कहा, “अपनी हर घरेलू विफलता के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की आदत पुरानी हो चुकी है।”

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