अमेरिकी विदेश विभाग के असिस्टेंट सेक्रेटरी एस. पॉल कपूर ने सोमवार को कहा है कि अमेरिका भारत के साथ मिलकर अपनी रक्षा साझेदारी को बढ़ा रहा है।
इसके साथ ही, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और दूसरी उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी गहरा कर रहा है।
हूवर इंस्टीट्यूशन में भारत पर आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में चर्चा के दौरान कपूर ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का भारत के साथ जुड़ाव सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ अमेरिका में नौकरियां भी पैदा कर रहा है।
न्यूक्लियर सहयोग और AI पर सहमती
कपूर ने X पर एक पोस्ट में लिखा, ‘ट्रंप प्रशासन में भारत के साथ अमेरिका का जुड़ाव देश के भीतर नौकरियां पैदा कर रहा है और उन सप्लाई चेन को मजबूत कर रहा है जो अमेरिका और इस क्षेत्र के लिए बहुत अहम हैं।
हम रक्षा और सिविल न्यूक्लियर सहयोग का विस्तार कर रहे हैं, जिसमें AI और अर्थव्यवस्था को गति देने वाली अन्य उभरती हुई टेक्नोलॉजी को अपनाना भी शामिल है।’
भारत-अमेरिका रक्षा संबंध
ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध और मजबूत हो रहे हैं। पिछले साल, दोनों देशों ने जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में रक्षा सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को मज़बूत करने के लिए एक फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे।
पिछले दो दशकों में भारत ने अमेरिका से रक्षा खरीद में काफी बढ़ोतरी की है। अपाचे, चिनूक हेलीकॉप्टर, C-17, C-130J ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, P-8I मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ़्ट और M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र जैसे हथियार और उपकरण हासिल किए हैं।’
क्या है शांति एक्ट?
सिविल न्यूक्लियर सहयोग भी तेजी पकड़ रहा है। इस साल की शुरुआत में, अमेरिका की प्रमुख न्यूक्लियर कंपनियों के सीनियर अधिकारियों के एक दल ने भारत में निवेश के मौकों का पता लगाने के लिए दौरा किया।
यह दौरा तब हुआ जब दिल्ली ने ‘शांति एक्ट’ (SHANTI Act) के जरिए अपने न्यूक्लियर लायबिलिटी फ़्रेमवर्क में बदलाव किया; इस कदम का मकसद देश के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम में प्राइवेट सेक्टर की ज्यादा भागीदारी को आसान बनाना था।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

