तमिलनाडु के राज्यपाल विश्वनाथ अर्लेकर ने गुरुवार को 17वीं तमिलनाडु विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार के नीतिगत विजन को पेश किया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार तमिल और अंग्रेजी पढ़ाने की मौजूदा दो-भाषा नीति का पालन करना जारी रखेगी।
राज्यपाल अर्लेकर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर राज्य सरकार के कड़े विरोध को दोहराया। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के तहत राज्य के 3,458 करोड़ रुपये के फंड को कथित तौर पर रोकने के लिए उसकी कड़ी आलोचना की।
अर्लेकर ने कहा कि केंद्र सरकार की यह शर्त कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत तमिलनाडु को मिलने वाले 3,458 करोड़ रुपये तभी जारी किए जाएंगे जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तीन-भाषा फॉर्मूले को लागू किया जाएगा, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।” उन्होंने केंद्र से अपने इस रुख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
तमिल भाषा का संरक्षण सरकार का मुख्य स्तंभ
राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा टीवीके सरकार अपने वेट्री तमिझगम विजन डॉक्यूमेंट के तहत तमिल भाषा के संरक्षण को अपना सबसे प्रमुख स्तंभ मानती है।
उन्होंने याद दिलाया कि1968 में जब पेरारिग्नर अन्ना मुख्यमंत्री थे, तब तमिलनाडु विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया था कि तीन-भाषा फॉर्मूले को हटाकर केवल दो भाषाएं तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई जानी चाहिए।
तब से लेकर आज तक तमिलनाडु में दो-भाषा नीति को अपनाया गया है। यह सरकार भी इसी नीति का पालन करेगी क्योंकि तमिलनाडु की जनता ने इसे स्वीकार किया है।
शिक्षा को राज्य सूची में शामिल करने की मांग
केंद्र की तीन-भाषा नीति की शर्त को अस्वीकार्य बताते हुए, राज्यपाल ने केंद्र सरकार से शिक्षा के विषय को संविधान की समवर्ती सूची से हटाकर राज्य सूची में शामिल करने का आग्रह किया।
उनका कहना था, “शिक्षा के समवर्ती सूची में होने के कारण ही नीट परीक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति थोपने और तीन-भाषा फॉर्मूले जैसे विवाद उत्पन्न हुए हैं। इसलिए, यह सरकार शिक्षा को समवर्ती सूची से राज्य सूची में ले जाने के लिए हर आवश्यक प्रयास करेगी।”
न्यायपालिका से जुड़ी अहम मांगें
अपने संबोधन में राज्यपाल ने केंद्र सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें भी रखीं कि मद्रास उच्च न्यायालय और इसकी मदुरै पीठ में तमिल को न्यायिक कार्यवाही की भाषा के रूप में अनुमति दी जाए।
दक्षिण भारत के लोगों की पहुंच को आसान बनाने के लिए चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की एक स्थायी पीठ स्थापित की जाए।
डीएमके और सत्ता पक्ष में तकरार
इससे पहले, डीएमके नेता टी.के.एस. एलनगोवन ने तमिलनाडु की वित्तीय स्थिति पर राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए श्वेत पत्र की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीति से प्रेरित है और चुनिंदा रूप से केवल पिछली डीएमके सरकार को निशाना बनाने के लिए उठाया गया है, जबकि केंद्र सरकार की आलोचना से बचा जा रहा है।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, तमिलनाडु के वित्त मंत्री मैरी विल्सन द्वारा जारी किए गए इस दस्तावेज पर प्रतिक्रिया देते हुए एलनगोवन ने कहा कि नई सरकार राज्यों को मिलने वाले वित्तीय आवंटन पर केंद्र से सवाल करने को तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा, “वे इस बात की परवाह नहीं करते कि असल में क्या हो रहा है। वे राज्यों को पर्याप्त धन न देने के मुद्दे पर भारत सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोलना चाहते क्योंकि वे बीजेपी सरकार से डरते हैं।”
एलनगोवन ने आगे आरोप लगाया कि राज्य के अच्छे आर्थिक प्रदर्शन के बावजूद, इस श्वेत पत्र का उद्देश्य राजनीतिक रूप से डीएमके को घेरना है।
दूसरी ओर, वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने राज्य की राजकोषीय स्थिति को “मानव निर्मित आपदा” करार दिया और पिछली सरकार के दौरान प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट आश्वासन दिया कि मौजूदा सरकार के नेतृत्व में जनता से जुड़ी सभी कल्याणकारी योजनाएं सुचारू रूप से जारी रहेंगी।


