देश में दवाओं और टीकों की कीमतें तय करने वाली सरकारी संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के तीन जरूरी टीकों की कीमतों में 20% बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। ये टीके बीसीजी (BCG), खसरा (Measles) और खसरा-रुबेला (MR) हैं।
सरकार का यह फैसला काफी हैरान करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर जब बाजार में किसी एक ही कंपनी का दबदबा होता है, तो सरकार कीमतों को बढ़ने नहीं देती।
समझिए क्यों बढ़ानी पड़ी कीमतें?
बता दें कि इससे पहले दिसंबर 2024 में NPPA ने ‘एकतरफा दबदबा’ होने का नियम लागू करके इन टीकों की तय कीमतों में 17.1% की कटौती कर दी थी।
इस कटौती के खिलाफ सीरम इंस्टीट्यूट ने दवा विभाग (DoP) के पास पुनर्विचार याचिका दर्ज की। कंपनी का कहना था कि इन टीकों को बनाना बेहद जटिल है, बाजार में इनके विकल्प बहुत कम हैं और इन्हें बनाने की लागत लगातार बढ़ रही है।
सप्लाई रुकने का खतरा
इसके अलावा दवा विभाग और NPPA ने माना कि ये टीके आम जनता की सेहत के लिए बहुत जरूरी हैं। अगर कंपनी को सही कीमत नहीं मिली, तो बाजार में इन जरूरी टीकों की कमी हो सकती है। इसलिए जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मोनोपॉली वाले नियम को हटाकर कीमतें बढ़ाने की इजाजत दे दी।


