रामगढ़ताल में टूट गई सांसों की डोर: तमाशबीन नहीं बनी भीड़, देवदूत बनकर कूदे युवा पर हार गई जिंदगी

रामगढ़ताल किनारे शुक्रवार की दोपहर में रौनक थी। चंपा देवी पार्क के आसपास लोग टहल रहे थे,बच्चे खेल रहे थे और परिवार संग घूमने आए लोग फोटो खिंचवा रहे थे। तभी अचानक ताल की ओर बढ़ी 14 वर्षीय ईशु उर्फ आलिया गहरे पानी में समा गई। देखते ही देखते हंसी-खुशी का माहौल चीख-पुकार में बदल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले तो लोगों को लगा कि किशोरी का पैर फिसल गया होगा, लेकिन जब वह पानी में डूबने लगी तो लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। कुछ ही पलों में वहां भारी भीड़ जुट गई। हर चेहरे पर घबराहट थी और हर निगाह पानी में किसी उम्मीद की तलाश कर रही थी।

शोर सुनते ही रास्ते से गुजर रहे बाइक सवार युवक रुके और ताल में कूद पड़े। पानी अधिक होने की वजह से किशोरी तक पहुंचने में 10 मिनट लगा। किनारे खड़े लोग लगातार आवाज लगाकर उनका हौसला बढ़ाते रहे। कुछ लोग हाथ जोड़कर दुआ मांगते रहे कि किसी तरह उसकी जान बच जाए।

काफी प्रयास के बाद उसे पानी से बाहर निकाला गया। बाहर आते ही वहां मौजूद लोगों ने उसे घेर लिया। किसी ने नब्ज टटोली, किसी ने हाथ-पैर रगड़े और कुछ लोगों ने सीपीआर देना शुरू कर दिया। हर कोई एक ही कोशिश में लगा था कि उसकी सांसें वापस लौट आएं।

मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि जब किशोरी को बाहर निकाला गया तब उसकी सांसे चल रही थी। इसी उम्मीद में उसे लगातार सीपीआर दिया जाता रहा। कुछ देर बाद पुलिस और एंबुलेंस पहुंची।

ताल किनारे मौजूद कई लोग तब तक वहीं खड़े रहे और अस्पताल से आने वाली खबर का इंतजार करते रहे। लेकिन जब यह सूचना मिली कि चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया है तो वहां मौजूद लोगों के चेहरे उतर गए। कई लोग एक-दूसरे से बस यही कहते नजर आए कि काश कुछ मिनट पहले बाहर निकाल लिया जाता।

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