क्या है तेलंगाना में दर्ज वो केस, जिसके कारण मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन हुआ रद?

मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया। आयोग ने यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया जिनमें कहा गया था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्रों में अपने खिलाफ चल रहे एक मामले का विवरण नहीं दिया।

कहा जा रहा है कि तेलंगाना में कांग्रेस नेता के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया था। रिटर्निंग ऑफिसर ने यह फेसला वरिष्ठ बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की शिकायत पर लिया।

शिकायत में क्या कहा गया था?

शिकायत में कहा गया था कि नटराजन से जुड़ा एक मामला तेलंगाना की अदालत में लंबित है और उन्होंने अपने नामांकन हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया था। वहीं, नटराजन और कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज कर दिया है और इसे राज्यसभा चुनाव में हेर-फेर करने की बीजेपी की कोशिश बताया।

इस फैसले से कांग्रेस मुश्किल में पड़ गई है क्योंकि अब पार्टी कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं उतार सकती क्योंकि नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून थी।

क्या है वो मामला?

कांग्रेस की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जो एक पूर्व कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव ए. श्रीलता की निजी शिकायत से जुड़ा है।

यह शिकायत सबसे पहले 2022 में राज्य कांग्रेस नेता कुंभम शिवकुमार रेड्डी के व्यवहार को लेकर दर्ज कराई गई थी। श्रीलता का आरोप था कि कुछ राजनीतिक नेताओं ने या तो राजनीतिक संरक्षण दिया या फिर उनके आरोपों की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की।

शिकायत में पार्टी पदाधिकारियों द्वारा परेशान करने, छेड़छाड़, धमकी देने और कोई कार्रवाई न करने के आरोप शामिल थे।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलता ने 2022 में आरोपी कुंभम शिवकुमार रेड्डी के खिलाफ हैदराबाद पुलिस से संपर्क किया था लेकिन सबूतों की कमी के कारण मामला बंद कर दिया गया था। सूत्रों के अनुसार, हैदराबाद और बेंगलुरु में उनकी बाद की निजी शिकायतों का भी निपटारा कर दिया गया।

नटराजन का नाम बहुत बाद में आया

2025 में श्रीलता ने हैदराबाद के नामपल्ली स्थित चौथी अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में एक याचिका दायर की, जिसमें मीनाक्षी नटराजन को चौथे आरोपी के तौर पर नामजद किया गया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने रेड्डी द्वारा कथित उत्पीड़न का मामला मीनाक्षी नटराजन के सामने भी उठाया था। उस समय वह तेलंगाना में कांग्रेस संगठन से जुड़ी हुई थीं। श्रीलता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के संविधान में अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रावधान होने के बावजूद, संबंधित नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

तो, मीनाक्षी नटराजन का नाम 2025 की बाद वाली शिकायत में आया, न कि 2022 की पहली शिकायत में। याचिका स्वीकार करते हुए अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए और नटराजन ने अदालत के नोटिस का जवाब दिया।

क्या मीनाक्षी नटराजन आरोपी हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता (BNS) के नए प्रावधानों के अनुसार मीनाक्षी नटराजन और अन्य लोग आरोपी नहीं बल्कि प्रतिवादी हैं, क्योंकि अदालत ने अभी तक इस मामले का संज्ञान नहीं लिया है। मामला अभी शुरुआती चरण में है और सुनवाई का इंतजार कर रहा है।

रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत मीनाक्षी नटराजन के साथ एक ‘प्रतिवादी’ (respondent) के तौर पर व्यवहार किया गया, न कि ‘आरोपी’ के तौर पर। यह धारा आपराधिक मामलों में शिकायतकर्ताओं और गवाहों की जांच-पड़ताल से जुड़ी है और इसने पुरानी सीआरपीसी की धारा 200 की जगह ली है।

इस कानून के तहत किसी मामले में आगे बढ़ने से पहले मजिस्ट्रेट के लिए शिकायतकर्ता की शपथ पर जांच करना जरूरी है। नटराजन के वकील ने यह भी कहा है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि श्रीलता ने केवल एक निजी याचिका दायर की थी और अदालत ने कोई प्रतिकूल निर्देश जारी नहीं किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *