अंतरराष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी को भी हरियाणा सरकार की खेल कोटा भर्ती में राहत नहीं मिल सकी।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक खिलाड़ी की याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि यदि कोई खिलाड़ी जूनियर स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है तो उसे खेल ग्रेडेशन नीति के अनुसार एक श्रेणी नीचे रखा जाएगा और अदालत केवल इसलिए नियमों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती क्योंकि उससे किसी उम्मीदवार को नुकसान हो रहा है।
मामला दिग्विजय सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2009 में मकाऊ (चीन) में आयोजित एशियन स्कूल्स बास्केटबॉल बॉयज चैंपियनशिप में भाग लिया था। इस उपलब्धि के आधार पर उन्हें चंडीगढ़ प्रशासन के खेल विभाग ने ग्रेड-बी खिलाड़ी का प्रमाणपत्र जारी किया था। बाद में हरियाणा में खेल कोटे के तहत भर्ती निकली तो उन्होंने आवेदन किया, लेकिन हरियाणा लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार ने उन्हें पात्र नहीं माना।
दिग्विजय सिंह का तर्क था कि उनकी प्रतियोगिता एशियाई स्तर की थी और उन्हें ग्रेड-बी खिलाड़ी माना जाना चाहिए। उन्होंने हरियाणा की खेल ग्रेडेशन नीति के नियम 6.2 को भी चुनौती दी। इस नियम के अनुसार यदि कोई प्रतियोगिता जूनियर स्तर की है तो उसे मूल श्रेणी से एक स्तर नीचे माना जाएगा।
याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि यह नियम भेदभावपूर्ण है। उनका कहना था कि कुछ उच्च श्रेणी की प्रतियोगिताओं में जूनियर स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों को भी ऊंचा ग्रेड मिलता रहता है, जबकि उनकी प्रतियोगिता को एक श्रेणी नीचे कर दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित पद के लिए उनके अलावा कोई अन्य उम्मीदवार नहीं था, इसलिए उन्हें नियुक्ति दी जा सकती थी।
हालांकि हाई कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न प्रतियोगिताओं की प्रकृति और महत्व को ध्यान में रखते हुए खेल ग्रेडेशन नीति बनाई है। कौन-सी प्रतियोगिता किस श्रेणी में आएगी, यह नीति निर्माताओं का निर्णय है और इसमें कोई मनमाना भेदभाव दिखाई नहीं देता।
अदालत ने कहा कि जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं को एक श्रेणी नीचे रखने का नियम सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होता है। केवल इस कारण कि किसी खिलाड़ी की श्रेणी कम हो रही है, नियम को असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता।
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करता तो केवल इसलिए उसे पात्र नहीं माना जा सकता कि उस पद के लिए अन्य कोई दावेदार मौजूद नहीं है। पात्रता का निर्धारण नीति और नियमों के अनुसार ही होगा।
इन टिप्पणियों के साथ हाई कोर्ट ने दिग्विजय सिंह की याचिका खारिज कर दी। फैसले के बाद खेल कोटे के तहत नियुक्ति पाने की उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है, वहीं अदालत ने हरियाणा सरकार की खेल ग्रेडेशन नीति को वैध ठहराते हुए उसमें हस्तक्षेप से इनकार कर दिया


